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बटुक भैरव मंत्र साधना सम्पूर्ण विधि - Batuk Bhairav Mantra Sadhna

बटुक भैरव मंत्र साधना Batuk Bhairav Mantra Sadhna  बटुक भैरव बहुत ही शीघ्र प्रसन्न होने वाले और तुरंत फल देने वाले देवता हैं। यह दुर्गा माता के लाडले पुत्र और शिव के अवतार हैं। यदि इनको अपना इष्ट बनाकर इनकी साधना प्रारम्भ की जाए तो आपकी ज़िंदगी के सभी कष्ट धीरे-धीरे ख़तम होने लगते हैं। नवग्रहों में से किसी भी गृह का दोष कुंडली में चल रहा हो आप बटुक भैरव जी के मंत्र की साधना करके उसका निवारण कर सकते हो।  यदि कोई साधक इनको अपना इष्ट मानकर रोज़ाना इनके मंत्र का जाप श्रद्धा और विश्वास के साथ करने लग जाता है तो बटुक भैरव जी आठों पहर (24 घंटे) उसकी छाया की तरह साथ रहकर रक्षा करते हैं। बटुक भैरव जी का जिस घर में मंत्र जाप रोज़ाना होता हो वहां पर जादू-टोना या कोई भी बुरी शक्ति का प्रभाव नहीं रहता है। बटुक भैरव जी का तीनों लोक में ऐसा प्रभाव है कि काल भी इनके नाम से कांपता है। बटुक भैरव मंत्र साधना के कुछ दिनों के बाद ही व्यक्ति को अनुभूतियाँ होनी शुरू हो जाती हैं। साधना के दौरान कई तरह के चमत्कार होने शुरू हो जाते हैं। यह सब बातें मैं अपने खुद के अनुभव से लिख रहा हूं। मैंने जिस विधि से बट...

Lesson-4 कुंडली के बारह भाव, Kundli ke 12 bhav

  कुंडली के बारह भाव (Kundali ke 12 bhav) चित्र नंबर.1 यह जो आप ऊपर कुंडली के बारह भाव देख रहे हो, असल में यह आकाश को बारह भागों में बांटा गया है| ज्योतिष विज्ञान में आकाश के 360° अंश(Degree) के नक़्शे को कुंडली के बारह भावों को बारह राशिओं में बांटा गया है और प्रत्येक भाव किसी एक राशि का भाव होता है| पंचांग के द्वारा किसी व्यक्ति के जन्म के सम्य और स्थान के मुताबिक उस सम्य ग्रहों की स्थिति के अनुसार व्यक्ति की जन्म लग्न कुंडली बनाई जाती है और उस सम्य अथवा स्थान के हिसाब से उस सम्य जो ग्रहों और राशिओं की स्थिति होती है उसको इस लगन कुंडली में लिखा जाता है| प्रत्येक भाव में कोई गृह 30° अंश(Degree) तक चलता है और फिर अगले भाव में चला जाता है, अंश(Degree) के बारे में हम आगे पढ़ेंगे| कुंडली देखने के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण जन्म लगन कुंडली होती है इसके साथ ही हम व्यक्ति की जन्म के सम्य के ग्रहों की स्थिति देख सकते हैं|ऊपर जैसे हमने कुंडली दिखाकर बताया है के भावों को कुंडली में लिखते कैसे हैं, अपने इस प्रथम भाव से द्वादश भाव तक कैसे क्रमांक इन भावों की गणता करनी है यह अच्छी तरह ...

Lesson-13, Kaal sarp dosh or yog , काल सर्प दोष या योग क्या है

काल सर्प दोष की पहचान और निवारण Kaal Sarp Dosh or Yog हमारे यहाँ काफी ढोंगी ज्योतिषों की तरफ से काल सर्प दोष या योग के बारे में तरह-तरह की भ्रांतियां बना कर लोगों से पूजा के नाम पर पैसे ऐंठे जाते हैं, जबकि ज्यादातर लोगों की कुंडली में काल सर्प दोष होता भी नहीं है| कुंडली में काल सर्प दोष को देखने के लिए कुछ सिद्धांत लागू होते हैं और उन सिद्धांतो की सभी शर्तें पूरी होने पर ही काल सर्प दोष माना जाता है| कुछ सिद्धांत या शर्तें ऐसी भी होती है, जिससे कुंडली में काल सर्प दोष भंग हो जाता है| हम आपको आगे काल सर्प दोष लागू होने के सिद्धांत, काल सर्प दोष के प्रकार और काल सर्प दोष के निवारण के बारे में विस्तार से बताते हैं| नोट:-  *  कुंडली में काल सर्प दोष के बारे में जानने से पहले आपको कुंडली में राहु और केतु की उच्च राशि, नीच राशि, मित्र राशि और शत्रु राशि का ज्ञान होना आवश्यक है, इसके बिना आप काल सर्प दोष के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त नहीं कर सकते| कुंडली में राहु और केतु की स्थिति के बारे में जानने के लिए आप पहले हमारे पेज Kundali Mein Rahu Ketu पर क्लि...

हनुमान रक्षा शाबर मंत्र, Hanuman Raksha Shabar Mantra

                    हनुमान रक्षा शाबर मंत्र हनुमान जी की साधना एक ऐसी साधना है, जिसके कुछ दिन करने पर ही आपको तरह-तरह की अनुभूतियाँ होनी शुरू हो जाती हैं | यदि किसी के ऊपर हनुमान जी की कृपा हो जाए तो उस व्यक्ति को किसी भूत-प्रेत, बुरी गृह दशा यहाँ तक के काल का भय भी नहीं रहता है , हनुमान जी के साधक का तीनों लोक में कोई अनिष्ट नहीं कर सकता| जब हम रोज़ाना उनकी साधना करने लग जाते हैं तो हमारे ऊपर उनकी प्रत्यक्ष रूप में कृपा होनी शुरू हो जाती है |  हम यहाँ पर आपको हनुमान जी का ऐसा रक्षा शाबर मंत्र बताएँगे, जिसकी साधना करके आप उनकी कृपा के पात्र बन पाओगे,  अतः अपनी और अपने परिवार की रक्षा कर सकोगे | इस मंत्र से आप दुनिया का भी भला कर सकते हो | यहाँ पर एक बात यह भी समझ लीजिए कि हनुमान जी के साधक बनना इतना आसान भी नहीं है, उनकी साधना करने के भी कुछ नियम हैं | यदि आप इन नियमों का पालन नहीं करते हो तो आपकी साधना कभी भी सफल नहीं हो सकती और आप हनुमान जी की कृपा के पात्र कभी नहीं बन सकते | हनुमान साधना के नियम :- वैसे तो हनुम...

नीलम रत्न धारण करने के लाभ - Blue Sapphire (Neelam) Stone Benefits in hindi

नीलम रत्न धारण करने के लाभ  Blue Sapphire Stone Benefits in hindi नीलम रत्न धारण करने के लाभ और पहचान - नीलम रत्न शनि देव का रत्न होता है। इसको शनि ग्रह के बल को बढ़ाने के लिए धारण किया जाता है। शनि ग्रह न्याय, हमारे कर्म, संघर्ष के कारक ग्रह होते हैं। यदि कुंडली में शनि देव की स्थिति अच्छी हो और हम नीलम रत्न धारण करें तो शनि से सबंधित कारकत्वों में बढ़ोतरी होती है। इसके अतिरिक्त शनि ग्रह व्यक्ति की जन्म कुंडली में जिस भाव में विराजित होते हैं, जिन भावों में शनि की राशियां मकर और कुम्भ होती हैं या शनि की जिन भावों पर 3 दृष्टियां (3, 7, 10 वीं  दृष्टि) होती है , शनि का रत्न नीलम धारण करने से उस भावों के फलों में भी वृद्धि होती है। मगर याद रहे शनि ग्रह का रत्न नीलम धारण करने के भी कुछ नियम होते हैं और यदि शनि की कुंडली में बुरी स्थिति होने पर रत्न धारण कर लिया जाये तो आपको लाभ के स्थान पर नुकसान हो सकता है। हम आपको शनि के रत्न नीलम धारण करने के नियम बताते हैं।  शनि रत्न नीलम धारण करने के नियम - यदि जन्म कुंडली में शनि ग्रह योग कारक होकर किसी अच्छे भाव अर्थात त्रिकोण भाव...

राहु बीज मंत्र विधि और लाभ - Rahu Beej Mantra in hindi

राहु बीज मंत्र का महत्व Beej Mantra of Rahu in hindi राहु बीज मंत्र विधि और लाभ - राहु और केतु छाया ग्रह होते हैं। इनको अदृश्य ग्रह भी कहा जाता है। राहु को नाग का मुख भी कहा जाता है। राहु ग्रह का प्रत्येक कुंडली में बहुत अधिक महत्व होता है। यह ग्रह कुंडली के जिस भाव में बैठता है, जिस राशि के साथ बैठता है और जिन ग्रहों पर अपनी दृष्टि डालता है, उन सबको प्रभावित करता है। कुंडली में राहु को शनि से भी अधिक पापी ग्रह माना गया है। राहु को शनि का छाया ग्रह कहा जाता है। राहु की तीन दृष्टियां जिन ग्रहों और भावों पर पड़ती है वह सब राहु से प्रभावित होते हैं। कुंडली में यदि राहु अच्छी स्थिति में हो तब भी यह व्यक्ति को गलत कार्यों से ही सफलता प्रदान करता है क्यूंकि राहु का कारक शराब, नशीली दवायें, जुआ-खाना, जेल, चरस, हस्पताल आदि होते हैं और यह योग कारक अर्थात बलि होने पर भी व्यक्ति को इन क्षेत्रों के द्वारा सफलता प्रदान करते हैं। राहु व्यक्ति की बुद्धि को चतुर तो करता है मगर राहु व्यक्ति की बुद्धि को उल्ट कार्यों में ही लगाता है। राहु के शुभ होने पर व्यक्ति शराबखाने, जुए, कीटनाशक दवाएं, हस्पताल, शमशा...