Skip to main content

Lesson-12 Vakri Grah- वक्रीय ग्रह क्या होते हैं?

वक्रीय ग्रह  क्या होते हैं?
What is Vakri Grah

Free online astrology classes in hindi, Free online astrology course in hindi

हमारे लोगों ने ग्रहों के वक्री होने को लेकर बहुत भ्रांतियां पाल रखी हैं कि ग्रह के वक्री होने पर वह उलटी दिशा में चलना शुरू कर देता है या वक्री होने पर वह बहुत बुरे फल देने लगता हैं| ऐसी भ्रांतियां फैला कर वक्री ग्रहों की शांति के लिए पूजा कराने के लिए कहा जाता है| असल में वक्री ग्रह का डर लोगों के मन में बैठा कर धंधा किया जाता हैं| 
कोई भी ग्रह जब वक्री होता हैं तो उसका बल(शक्ति) दुगनी हो जाती है| यदि वह गृह कुंडली में योग कारक ग्रह होता है तो हमें दोगुने(Double) अच्छे फल देने लगता हैं और यदि मारक होगा तो हमें दोगुने  बुरे फल देने लगता है| कुंडली में सिर्फ वक्री ग्रह की राशि देखकर हम किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सकते कि वक्री ग्रह अच्छे फल देगा या बुरे फल देगा, इसलिए किसी अच्छे ज्योतिष से कुंडली दिखाकर ही कोई उपाय करना चाहिए| हम आपको आगे वक्री ग्रह के अर्थ और इसके कुंडली में प्रभाव बताते हैं। 


वक्री और मार्गी का अर्थ(Meaning of vakri and margi):- वक्री का अर्थ होता हैं रास्ता भटकना या टेढे रास्ते पर चलना| सभी गृह सौरमण्डल की कक्षा में चारों और आपने मार्ग पर एक गति से चलते हैं|मगर कई बार जब कोई ग्रह आपने रास्ते से भटक कर गलत दिशा में चलना शुरू कर देता है तो हम कहते हैं कि ग्रह  वक्री हो गया है| इस स्थिति में ग्रह  अपनी चाल बदल लेता है और आपने रास्ते से भटक जाता है| ऐसी स्थिति में दूसरे ग्रह उससे आगे निकल जाते हैं और वक्री ग्रह पीछे रह जाता है| जब फिर वह ग्रह आपने सही रास्ते पर चलना शुरू कर देता है तो हम कह देते हैं कि ग्रह मार्गी हो गया है|
कुंडली में हम जो 12 भाव देखते हैं, वह आकाश मण्डल को 12 भावों में बांटा गया है और इन बारह भावों में 12 राशियां होती हैं| इन राशियों में सभी ग्रह एक भाव से अगले भाव में भ्रमण करते हुए चलते हैं, मगर जब कोई ग्रह वक्री हो जाता है तो वह अपना मार्ग बदलने से उस भाव या राशि में ज्यादा देर तक भ्रमण करता है और दूसरे ग्रह अपनी चाल के मुताबिक आगे निकल जाते हैं| कई लोग यहाँ कह देते हैं कि वक्री ग्रह उलटी दिशा में चलने लगा हैं| मगर यह सच नहीं हैं बल्कि उस वक़्त दूसरे ग्रह अपनी चाल से चलते हुए आगे निकल जाते हैं और वक्री ग्रह पीछे रह जाता है|
आपको यह याद रखना है कि कभी भी सूर्य और चंद्र वक्री नहीं होते हैं जबकि राहु और केतु हमेशा वक्री चलते हैं|
हम आपको आगे बताते हैं कि सभी ग्रह कितने सम्य तक एक राशि में भ्रमण करते हैं अर्थात कितनी देर बाद अपनी राशि बदलते हैं|

कुंडली दिखाए:- आप घर बैठे कुंडली का विश्लेषण करा सकते हो। सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण में लग्न कुंडली, चंद्र कुंडली, नवमांश कुंडली, गोचर और अष्टकवर्ग, महादशा और अंतरदशा, कुंडली में बनने वाले शुभ और अशुभ योग, ग्रहों की स्थिति और बल का विचार, भावों का विचार, अशुभ ग्रहों की शांति के उपाय, शुभ ग्रहों के रत्न, नक्षत्रों पर विचार करके रिपोर्ट तैयार की जाती है। सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण की फीस मात्र 500 रुपये है।  Whatsapp- 8360319129 Barjinder Saini (Master in Astrology)    

Comments

Popular posts from this blog

Lesson-4 कुंडली के बारह भाव, Kundli ke 12 bhav

  कुंडली के बारह भाव (Kundali ke 12 bhav) चित्र नंबर.1 यह जो आप ऊपर कुंडली के बारह भाव देख रहे हो, असल में यह आकाश को बारह भागों में बांटा गया है| ज्योतिष विज्ञान में आकाश के 360° अंश(Degree) के नक़्शे को कुंडली के बारह भावों को बारह राशिओं में बांटा गया है और प्रत्येक भाव किसी एक राशि का भाव होता है| पंचांग के द्वारा किसी व्यक्ति के जन्म के सम्य और स्थान के मुताबिक उस सम्य ग्रहों की स्थिति के अनुसार व्यक्ति की जन्म लग्न कुंडली बनाई जाती है और उस सम्य अथवा स्थान के हिसाब से उस सम्य जो ग्रहों और राशिओं की स्थिति होती है उसको इस लगन कुंडली में लिखा जाता है| प्रत्येक भाव में कोई गृह 30° अंश(Degree) तक चलता है और फिर अगले भाव में चला जाता है, अंश(Degree) के बारे में हम आगे पढ़ेंगे| कुंडली देखने के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण जन्म लगन कुंडली होती है इसके साथ ही हम व्यक्ति की जन्म के सम्य के ग्रहों की स्थिति देख सकते हैं|ऊपर जैसे हमने कुंडली दिखाकर बताया है के भावों को कुंडली में लिखते कैसे हैं, अपने इस प्रथम भाव से द्वादश भाव तक कैसे क्रमांक इन भावों की गणता करनी है यह अच्छी तरह ...

पन्ना रत्न धारण करने के लाभ - Emerald (Panna) stone benefits in hindi

पन्ना रत्न धारण करने के लाभ Emerald stone benefits in hindi पन्ना रत्न के लाभ और पहचान (Benefits of Emerald Stone):-  पन्ना रत्न बुध ग्रह का रत्न होता है। इस रत्न को बुध ग्रह के बल को बढ़ाने के लिए धारण किया जाता है। बुध ग्रह हमारी बुद्धि का कारक ग्रह होता है और इसके रत्न पन्ना को धारण करने से हमारी बुद्धि का बल बढ़ता है और हमारी समरण शक्ति बढ़ती है। पन्ना रत्न धारण करने से व्यक्ति को ज्योतिष, पत्रकारी, शिक्षक, वकालत के क्षेत्र में लाभ मिलता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध सूर्य से अस्त हो या बलहीन हो तब इसका रत्न पन्ना को धारण करने से बुध ग्रह को बल मिलता है।   इसके अतिरिक्त बुध ग्रह कुंडली के जिस भाव में बैठा हो, जिन भावों में उसकी मिथुन और कन्या राशि हो और जिन भाव पर बुध की दृष्टि हो, पन्ना रत्न धारण करने से उन भावों के फलों में वृद्धि होती है।  रत्न क्यों धारण करना चाहिए ?  -    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति अपने पिछले जन्म के संचित कर्मों को साथ लेकर जन्म लेता है और उसके पिछले जन्म के संचित कर्मों के मुताबिक उसकी जन्म कुंडली का नि...

बटुक भैरव मंत्र साधना सम्पूर्ण विधि - Batuk Bhairav Mantra Sadhna

बटुक भैरव मंत्र साधना Batuk Bhairav Mantra Sadhna  बटुक भैरव बहुत ही शीघ्र प्रसन्न होने वाले और तुरंत फल देने वाले देवता हैं। यह दुर्गा माता के लाडले पुत्र और शिव के अवतार हैं। यदि इनको अपना इष्ट बनाकर इनकी साधना प्रारम्भ की जाए तो आपकी ज़िंदगी के सभी कष्ट धीरे-धीरे ख़तम होने लगते हैं। नवग्रहों में से किसी भी गृह का दोष कुंडली में चल रहा हो आप बटुक भैरव जी के मंत्र की साधना करके उसका निवारण कर सकते हो।  यदि कोई साधक इनको अपना इष्ट मानकर रोज़ाना इनके मंत्र का जाप श्रद्धा और विश्वास के साथ करने लग जाता है तो बटुक भैरव जी आठों पहर (24 घंटे) उसकी छाया की तरह साथ रहकर रक्षा करते हैं। बटुक भैरव जी का जिस घर में मंत्र जाप रोज़ाना होता हो वहां पर जादू-टोना या कोई भी बुरी शक्ति का प्रभाव नहीं रहता है। बटुक भैरव जी का तीनों लोक में ऐसा प्रभाव है कि काल भी इनके नाम से कांपता है। बटुक भैरव मंत्र साधना के कुछ दिनों के बाद ही व्यक्ति को अनुभूतियाँ होनी शुरू हो जाती हैं। साधना के दौरान कई तरह के चमत्कार होने शुरू हो जाते हैं। यह सब बातें मैं अपने खुद के अनुभव से लिख रहा हूं। मैंने जिस विधि से बट...

हवन की विधि और महत्व, Havan ki vidhi

हवन की विधि और महत्व Hawan Vidhi at home हवन शुरू करने की विधि और मंत्र (Havan shuru karne ka mantra aur vidhi)-  कई साधक ऐसे होते हैं जो हवन करने की जटिल प्रक्रिया, मुश्किल से मिलने वाली सामग्री और संस्कृत के कठिन श्लोकों के कारण हवन नहीं कर पाते हैं| हम आपको यहाँ हवन की बहुत सरल विधि बताएंगे, इस विधि से आप खुद आसानी से मिलने वाली सामग्री के साथ हवन कर सकते हैं| यह जो विधि बताई जा रही है इसका प्रयोग शांति कर्म और देव हवन के लिए करना है| नवग्रह हवन, तामस हवन और कौड़ा हवन का प्रयोग अलग विधि और सामग्री से होता है| इसके लिए आप अलग से हमारे ब्लॉग पर विधि विधान देख सकते हो|  हवन का महत्व- हिन्दू धर्म में हवन का बहुत महत्व है| हिन्दू धर्म में 4 प्रमुख यज्ञ का वर्णन है, उसमें से हवन यज्ञ या देव यज्ञ को सबसे प्रमुख स्थान प्राप्त है| हिन्दू धर्म में 4 यज्ञ का नाम मनुष्य यज्ञ, पितर यज्ञ, भूत यज्ञ और देव यज्ञ है,  इसमें मनुष्य यज्ञ पृथ्वी के लोगों की भलाई के लिए किया जाता है, पितर यज्ञ स्वर्ग सिधार चुके पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है, भूत यज्ञ पृथ्वी के पशु-पक्षिय...

कुंडली में महाभाग्य योग - Mahabhagya Yog in Kundali in hindi

कुंडली में महाभाग्य योग  Mahabhagya Yog in Kundali कुंडली में महाभाग्य योग- कुंडली में महाभाग्य योग एक ऐसा योग है जिसकी कुंडली में यह योग पूर्ण रूप से बनता है। वह व्यक्ति ज़िंदगी में हर मुकाम को प्राप्त करने की क्षमता रखता है। कुंडली में महाभाग्य योग बनने वाले व्यक्ति को ज़िंदगी में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं मगर फिर भी ऐसे व्यक्ति की किस्मत उसका ऐसा साथ देती है कि उसके सभी कार्य सम्पूर्ण जरूर होते हैं। ऐसा योग बनने वाले व्यक्ति कि बारे में दुनिया यदि सोच रखती है कि इस व्यक्ति की किस्मत बहुत अच्छी है। महाभाग्य योग पुरुष और स्त्री को दोनों की कुंडली में अलग-अलग नियमों से बनता है। हम आपको आगे महाभाग्य योग बनाने वाले सभी नियमों की जानकारी देते हैं और साथ कुंडली में यह योग भंग कैसे होता है उसकी जानकारी भी देते हैं।  पुरुष की कुंडली में महाभाग्य योग  पहला नियम - पहला नियम यह है कि कुंडली में महाभाग्य योग होने के लिए पुरुष की कुंडली में लग्न भाव, सूर्य और चंद्र ग्रह विषम राशिओं में होने चाहिए अर्थात इनकी राशि 1, 3, 5, 7, 9  और 11  होनी चाहिए।  जैसे आप ऊपर चित्र ...

बाबा कालीवीर चालीसा और आरती, Baba Kaliveer ji Chalisa Aarti

बाबा कालीवीर चालीसा और आरती  कालीवीर चालीसा  काली-पुत्र का नाम ध्याऊ, कथा विमल महावीर सुनाऊ| संकट से प्रभु दीन उभारो, रिपु-दमन है नाम तिहारो| विद्या, धन, सम्मान की इच्छा, प्रभु आरोग्य की दे दो भिक्षा| स्वर्ण कमल यह चरण तुम्हारे, नेत्र जल से अरविंद पखारे| कलिमल की कालिख कटे, मांगू मैं वरदान|  रिद्धि-सिद्धि अंग-संग रहे,  सेवक लीजिए जान| श्री कुलपति कालीवीर प्यारे,  कलयुग के तुम अटल सहारे|  तेरो बिरद ऋषि-मुनि हैं गावें,  नाम तिहारा निसदिन धयावे| संतों के तुम सदा सहाई,  ईश पिता और कलिका माई| गले में तुम्हारे हीरा सोहे,  जो भक्तों के मन को मोहे| शीश मुकट पगड़ी संग साजे,  द्वार दुंदुभी, नौबत बाजे| हो अजानुभुज प्रभु कहलाते,  पत्थर फाड़ के जल निसराते| भुजदंड तुम्हारे लोह के खम्भे,  शक्ति दीन्ह तुम्हे माँ जगदम्बे| चरणन में जो स्नेह लगाई,  दुर्गम काज ताको सिद्ध हो जाई| तेरो नाम की युक्ति करता,  आवागमन के भय को हरता| जादू-टोना, मूठ भगावे,  तुरतहि सोए भाग्य जगावे| तेरो नाम का गोला दागे,  भूत...