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रत्नों का अर्थ और महत्व - Meaning of Gemstone in hindi

रत्नों का अर्थ और महत्व 
Meaning of Gemstone in hindi

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रत्नों का हमारे वैदिक ज्योतिष शास्त्र में बहुत महत्व बताया गया है। रत्नों का प्रयोग सोने और चांदी की ज्वेलरी में किया जाता है। यह रत्न दो प्रकार के होते हैं। 1. कीमती रत्न (Precious Stone) 2. अर्द्ध-कीमती रत्न (Non-Precious Stone)। जो रत्न दुर्लभ होते हैं और जिसका उत्पादन किसी विशेष स्थान से बहुत कम मात्रा में होता है, उसको हम कीमती (Precious Stone) रत्न कहते हैं। कीमती रत्न में श्रीलंका का नीलम (Blue Sapphire) और पीला पुखराज (Yellow Sapphire), पाडर का नीलम और पुखराज, दक्षिणी समुन्द्र का सुच्चा मोती (Pearl), हीरा (Diamond), ऑस्ट्रेलियन फायर ओपल (Australian Fire Opal) आदि आ जाते हैं। इन कीमती रत्नों (Precious Stone) की कीमत हज़ारों से शुरू होकर लाखों तक होती है। वहीँ अर्द्ध-कीमती रत्न (Non-Precious Stone) सामान्य खदानों और पत्थरों से प्राप्त हो जाते हैं। अर्द्ध-कीमती रत्न में लहसुनिया (Cat's Eye Stone), मूंगा (Coral), सामान्य सुच्चा मोती (Common Pearl), गोमेद (Hessonite) आदि आ जाते हैं। इन रत्नों की कीमत कम ही होती है। इसके अतिरिक्त हज़ारो प्रकार के कीमती (Precious) और अर्द्ध-कीमती (Non-Precious) रत्न होते हैं|


रत्नों का महत्व (Benefits of Gemstone):- यदि हम अपना इतिहास देखें तो हमें पता चलता है कि भारत में पुरातन काल से ही रत्नों का बहुत महत्व रहा है| भारत में पुरातन काल में राजा और उनके शाही परिवार के आभूषण और वस्त्र रत्नों से बने हुए होते थे और यह रत्न बेशुमार कीमती होते थे| यहाँ इन रत्नों का प्रयोग ख़ूबसूरती को चार चाँद लगाने के लिए किया जाता था वहीँ ज्योतिष शास्त्र के महत्व के अनुसार भी इसका प्रयोग किया जाता था| ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति का शरीर नवग्रहों की अदृश्य रश्मियों (किरणों) से प्रभावित होता है| ज्योतिष शास्त्र में प्रत्येक व्यक्ति के जन्म के सम्य सभी ग्रहों की आकाशमण्डल में जो स्थिति होती है उसके अनुसार जन्म कुंडली तैयार की जाती है और उस जन्म कुंडली के आधार पर निर्धारित होता है कि उस वक़्त कौन से ग्रह आपके योग कारक ग्रह (मित्र ग्रह) हैं और कौन से मारक ग्रह (शत्रु ग्रह) हैं| यदि उस वक़्त आपकी कुंडली में कोई मित्र ग्रह सूर्य के पास होने से अस्त हो गया है या उसका अंश (Degree) कम या अधिक है तो उस मित्र ग्रह की अदृश्य रश्मियां (किरणे) आपके ऊपर नहीं पड़ती हैं और वह ग्रह आपको अच्छे फल देने के सक्षम नहीं रहता है| तब ज्योतिष विद्या के अनुसार आप उस ग्रह से सबंधित रत्न धारण करते हो तो आपके शरीर में उस ग्रह की रश्मियों का संचार होना शुरू हो जाता है और वह ग्रह आपको फल देने में समक्ष हो जाता है| यह ग्रहों के रत्न एक चुम्बक की तरह कार्य करते हैं, जो सबंधित ग्रह की रश्मियों का चुंबकिये तरीके से हमारे शरीर में संचार कराने में मददगार होते हैं| 

जैसे हमारे शरीर के विकास के लिए सभी प्रकार के खणिज और विटामिनों की उचित मात्रा में आवश्यकता होती है, वैसे ही ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारे शरीर को सभी ग्रहों की कुछ उचित मात्रा में रश्मियों की आवश्यकता होती है और इन ग्रहों की रश्मियों की मात्रा को पूर्ण करने के लिए ही रत्न धारण किए जाते हैं| ज्योतिष शास्त्र में 9 ग्रहों के 9 प्रकार के रत्न बताए गए हैं| जैसे सूर्य ग्रह का रत्न माणिक (Ruby Stone),  चंद्र ग्रह का सुच्चा मोती (Pearl Stone),  मंगल ग्रह का मूंगा रत्न (Coral Stone), बुध ग्रह का पन्ना रत्न (Emerald Stone), बृहस्पति ग्रह का पीला पुखराज रत्न (Yellow Sapphire), शुक्र ग्रह का हीरा रत्न (Diamond Stone), शनि ग्रह का नीलम रत्न (Blue Sapphire), राहु ग्रह का गोमेद रत्न (Hessonite Stone) और केतु ग्रह का लहसुनिया रत्न (Cat's Eye Stone)| इन सभी 9 प्रकार के रत्नों को नवग्रह रत्न भी कहा जाता है|इन नवग्रहों के कुछ उप-रत्न भी होते हैं, जिनकी कीमत कम होती है और उनको हम अर्द्ध-कीमती रत्न (Non-Precious Stone)  भी कहते हैं| 

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