चंद्र कुंडली और चंद्र राशि का महत्व
Chandra Kundali and Chandra Rashi in hindi
चंद्र कुंडली और चंद्र राशि का महत्व (Importance of Chandra kundali in Astrology)- ज्योतिष शास्त्र में किसी व्यक्ति की कुंडली का विश्लेषण करने में चंद्र कुंडली और चंद्र राशि का बहुत महत्व होता है। क्या आपको पता है कि ज्योतिष शास्त्र में चंद्र राशि और चंद्र नक्षत्र को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है। अब हम आगे जानते हैं कि चंद्र कुंडली का इतना महत्व क्यों होता है।
ज्योतिष शास्त्र में प्रत्येक ग्रह किसी ना किसी चीज़ का कारक होता है, ऐसे ही चंद्र हमारे मन का कारक ग्रह होता है। आप जानते ही होंगे कि हमारे शरीर में सबसे महत्वपूर्ण अंग हमारा मन होता है, जो कि हमारे सम्पूर्ण शरीर को नियंत्रण करता है। हमारे भाव और हमारे दुःख-सुख हमारे मन से ही प्रगट होते हैं। हम ऐसे भी कह सकते हैं कि हमारे सम्पूर्ण शरीर का राजा हमारा मन होता है।
ऐसे ही कुंडली में चंद्र राशि को अधिक महत्व दिया जाता है। किसी भी कुंडली में चंद्र जिस राशि में बैठा होता है, उसी राशि से व्यक्ति के गुण और स्वाभाव का अनुमान लगाया जाता है। उदाहरण के लिए यदि चंद्र ग्रह सिंह राशि में होगा तो हम यह कह सकते हैं कि सिंह राशि का स्वामी सूर्य ग्रह है, जिस कारण व्यक्ति का स्वाभाव जल्द गुस्से में आने वाला होगा और व्यक्ति निडर,सत्य बोलने वाला और न्यायप्रिय होगा और ऐसे ही यदि कुंडली में चंद्र ग्रह शुक्र की राशि वृषभ में होगा तो व्यक्ति मधुरभाषी, सुंदर वस्त्रों और इत्र आदि का शौकीन, स्त्रिओं में रति रहने वाला होगा। यहाँ पर चंद्र राशि के साथ साथ चंद्र ग्रह का नक्षत्र और चंद्र को नवांश कुंडली में भी देखना अनिवार्य होता है। तभी हम सटीक विश्लेषण कर सकते हैं। जैसे यदि चंद्र शुक्र की राशि वृषभ में है और वहीँ चंद्र किसी ऐसे नक्षत्र में है जिसका स्वामी क्रूर ग्रह है और साथ में चंद्र किसी क्रूर नवांश में भी चला जाए तो आप मिश्रित फल बताकर उस कुंडली का विश्लेषण करोगे। अर्थात उस व्यक्ति से गुण मिश्रित होंगे।
चंद्र कुंडली कैसे बनाएंChandra Kundali Kaise Banaye
सबसे पहले हमें यह ज्ञात होना चाहिए कि जन्म कुंडली से चंद्र कुंडली कैसे बनाते हैं। लग्न कुंडली (जन्म कुंडली) से चंद्र कुंडली बनाना बहुत आसान है। जैसे आप ऊपर चित्र नंबर. 1 में देख रहे हो कि यह लग्न कुंडली सिंह राशि की है और इस लग्न राशि में दशम भाव में चंद्र वृषभ राशि में बैठे हुए हैं। अब हमें इस लग्न कुंडली में यहाँ भी चंद्र बैठा हो उस भाव को लग्न भाव (प्रथम भाव) बनाकर बाकी सारे राशि नंबर और ग्रह वैसे ही अंकित कर देने हैं। जैसे आप चित्र नंबर. 2 में देख रहे हो कि लग्न कुंडली के दशम भाव को प्रथम भाव बनाकर आगे के सारे भाव जैसे लग्न भाव में हैं वैसे ही अंकित कर देने हैं। ऐसे लग्न कुंडली से चंद्र कुंडली बनाई जाती है।
चंद्र कुंडली कैसे देखेंChandra Kundali Kaise Dekhe
जैसे हम ऊपर यह जान चुके हैं कि चंद्र ग्रह हमारे मन का कारक होता है और चंद्र कुंडली हमारे मन की स्थिति देखने के लिए होती है। व्यक्ति का मन ही उसके शरीर का राजा होता है, यदि हमारा मन शांत अवस्था में है तो हमारा शरीर भी सुखी होगा और यदि हमारा मन ही बेचैन होगा तो हम सब कुछ पाकर भी बेचैन ही रहेंगे। अब हम बात करते हैं कि चंद्र राशि को देखा कैसे जाता है।
उदाहरण के लिए आप मान लीजिये ऊपर चित्र नंबर. 2 किसी व्यक्ति की चंद्र कुंडली है और अब हम इस चंद्र कुंडली से व्यक्ति के बारे में कैसे देखेंगे। जैसे चंद्र कुंडली में चंद्र ग्रह प्रथम भाव में ही होता है, इस कुंडली में चंद्र 2 नंबर राशि (वृषभ राशि) में बैठा हुआ है और वृषभ राशि के स्वामी शुक्र ग्रह होता है और हम सब यह जानते हैं कि शुक्र एक सौम्य ग्रह है तो हम यहाँ यह कह सकते हैं कि यह व्यक्ति शांत स्वाभाव का और सुंदर वस्त्र डालने वाला होना चाहिए। प्रथम भाव कालपुरुष की कुंडली में हमारे मस्तिष्क का कारक होता है और हमारा मन भी मस्तिष्क में आता है। ऐसे ही हम चंद्र कुंडली के दृत्य भाव से देखेंगे कि हमारा मन हमारे द्वारा धन संचित से संतुष्ट होगा के नहीं। तृत्य भाव से हमारे मन को कितना परिश्रम करना पड़ेगा या हम ऐसे भी कह सकते हैं कि हमारे कार्य के मन के द्वारा कितना परिश्रम होगा और तृत्य भाव से हमारे मन में अपने छोटे भाई-बहन के प्रति कैसी भावना है यह भी पता चलता है। ऐसे ही चंद्र कुंडली के चतुर्थ भाव से हमें यह पता चलता है कि हमारा मन हमारी सम्पति, घर और वाहन से कितना संतुषट है। यदि हम चंद्र कुंडली कि दशम भाव की बात करें तो हमें इससे यह पता चलता है कि हमारा मन हमारे कार्य क्षेत्र में लगता है कि नहीं या हम ऐसे भी कह सकते हैं कि हमारा मन हमारे कार्य क्षेत्र को लेकर कैसा है। ऐसे ही हम चंद्र कुंडली द्वारा सभी भावों का विश्लेषण कर सकते हैं। याद रहे जैसे लग्न कुंडली या जन्म कुंडली में सभी भाव को हमारे शरीर से जोड़ कर भावों का विश्लेषण किया जाता है, ऐसे ही चंद्र कुंडली से हमारे मन को जोड़ कर सभी भावों के विश्लेषण किया जाता है।
यहाँ पर एक बात याद रखिए कि चंद्र कुंडली और चंद्र राशि के साथ-साथ चंद्र ग्रह किस नवांश में गया है और चंद्र पक्ष बलि है या कमजोर है, चंद्र की युति कौन से ग्रहों के साथ है, चंद्र ग्रह पर कौन कौन से ग्रहों की दृष्टि है, कुंडली में केमद्रुम योग तो नहीं बन रहा, यह सब बातों का भी विश्लेषण करके किसी परिणाम पर पहुंचना चाहिए।
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नोट- नवग्रहों के बीज मंत्र की विधि|
*सूर्य बीज मंत्र *चंद्र बीज मंत्र *मंगल बीज मंत्र



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