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कुंडली में महाभाग्य योग - Mahabhagya Yog in Kundali in hindi

कुंडली में महाभाग्य योग 
Mahabhagya Yog in Kundali

महाभाग्य योग , कुंडली में शुभ योग , Mahabhagya yoga in kundali or astrology in hindi, raj yoga in kundali or astrology, which is the best yog in kundali

कुंडली में महाभाग्य योग- कुंडली में महाभाग्य योग एक ऐसा योग है जिसकी कुंडली में यह योग पूर्ण रूप से बनता है। वह व्यक्ति ज़िंदगी में हर मुकाम को प्राप्त करने की क्षमता रखता है। कुंडली में महाभाग्य योग बनने वाले व्यक्ति को ज़िंदगी में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं मगर फिर भी ऐसे व्यक्ति की किस्मत उसका ऐसा साथ देती है कि उसके सभी कार्य सम्पूर्ण जरूर होते हैं। ऐसा योग बनने वाले व्यक्ति कि बारे में दुनिया यदि सोच रखती है कि इस व्यक्ति की किस्मत बहुत अच्छी है। महाभाग्य योग पुरुष और स्त्री को दोनों की कुंडली में अलग-अलग नियमों से बनता है। हम आपको आगे महाभाग्य योग बनाने वाले सभी नियमों की जानकारी देते हैं और साथ कुंडली में यह योग भंग कैसे होता है उसकी जानकारी भी देते हैं। 

पुरुष की कुंडली में महाभाग्य योग 
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पहला नियम - पहला नियम यह है कि कुंडली में महाभाग्य योग होने के लिए पुरुष की कुंडली में लग्न भाव, सूर्य और चंद्र ग्रह विषम राशिओं में होने चाहिए अर्थात इनकी राशि 1, 3, 5, 7, 9 और 11 होनी चाहिए। जैसे आप ऊपर चित्र नंबर. 1 में देख रहे हो कि यह मेष लग्न की जन्म कुंडली है। इस कुंडली के लग्न भाव में 1 नंबर राशि अर्थात मेष राशि है और इस कुंडली में चंद्र 5 नंबर राशि अर्थात सिंह राशि में और सूर्य 9 नंबर राशि अर्थात धनु राशि में है। इस तरह से इस कुंडली में लग्न, चंद्र और सूर्य विषम राशिओं में होने से पुरुष की कुंडली में महाभाग्य योग बनने की एक शर्त पूरी हो जाती है।  

दूसरा नियम पुरुष की कुंडली में महाभाग्य योग बनने का दूसरा नियम यह है कि जब किसी व्यक्ति का जन्म दिन के सम्य में हुआ हो। यहाँ पर हम आपको बता दें कि दिन के सम्य से तातपर्य है कि पुरुष का जन्म दोपहर के सम्य के जितना नज़दीक हुआ होगा उतना यह योग प्रबल बनता है। दोपहर से जितना पहले और जितना बाद व्यक्ति का जन्म सम्य होगा उतना ही इस महाभाग्य योग का प्रभाव कम होता जाता है और इसका फल उतना कम देखने को मिलता है। 

स्त्री की कुंडली में महाभाग्य योग 

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पहला नियम- स्त्री की कुंडली में महाभाग्य योग बनने का पहला नियम यह है कि स्त्री की जन्म कुंडली में लग्न भाव, चंद्र और सूर्य ग्रह सम राशियों में होने चाहिए। सम राशि से तातपर्य है कि लग्न, चंद्र और सूर्य  2, 4, 6, 8, 10 और 12 राशि में होने चाहिए। जैसे आप चित्र नंबर. 2 में देख रहे हो कि यह स्त्री की जन्म कुंडली है और इस कुंडली में लग्न भाव 8 नंबर राशि अर्थात वृश्चिक राशि है और चंद्र यहाँ 2 नंबर राशि अर्थात वृषभ राशि में है और सूर्य यहाँ 6 नंबर राशि अर्थात कन्या राशि में है। इस तरह से इस स्त्री की कुंडली में लग्न, चंद्र और सूर्य का सम राशियों में होने से पहली शर्त पूरी हो जाती है। 

दूसरा नियम- स्त्री की कुंडली में महाभाग्य योग बनने की दूसरी शर्त यह है कि स्त्री का जन्म रात्रि का होना चाहिए। स्त्री का जन्म जितना मध्य रात्रि कि समीप का होगा यह महाभाग्य योग उतना ही प्रबल होकर अपना फल देगा। 

यहाँ पर आपको बता दें कि यदि किसी पुरुष या स्त्री कि कुंडली में ऊपर दिए दोनों नियम लागू होते हैं तभी महाभाग्य योग बनेगा। 

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