Skip to main content

हनुमान दर्शन शाबर मंत्र- Hanuman Darshan Shabar Mantra

हनुमान प्रत्यक्ष दर्शन शाबर मंत्र साधना
Hanuman Darshan Mantra Sadhna 

हनुमान शाबर मंत्र, Hanuman darshan shabar mantra, hanuman prataksh shabar mantra

यदि आप हनुमान जी के सच्चे भक्त हो और आप ऐसी साधना करने की इच्छा रखते हो, जिससे आपको हनुमान जी के प्रत्यक्ष दर्शन हों, तो आपको हम हनुमान जी की एक बहुत चमत्कारी और गुप्त साधना बताने जा रहें हैं| 
यदि आप इस साधना को श्रद्धा, विश्वास और नियम के अनुसार करना शुरू कर देते हो, तो बहुत जल्द ही साधना के बीच में  आपको हनुमान जी की कृपा से अनुभूतियाँ होनी शुरू हो जाती हैं| इस साधना से आपके अंदर ऐसी शक्ति का संचार होना शुरू हो जाता है,  जिससे आप भूत-प्रेत और अन्य बुरी शक्तियों से ग्रस्त अन्य लोगों का भी निवारण कर सकते हो|
याद रहे किसी भी साधना में सफलता तभी मिलती है जब आपकी साधना,इष्ट देव और मंत्र में पूर्ण श्रद्धा और विश्वास होता है| असल में श्रद्धा और विश्वास आपको किसी मंत्र में सिद्धि एवं सफलता दिलाते हैं| बाकी सभी विधि-विधान और नियम इसके बाद आते हैं| यदि किसी मंत्र की शंकावान होकर साधना की जाए तो आप चाहे कितने भी नियम अपनाकर और कठिन साधना कर लें, मगर आपको सफलता कभी नहीं मिल सकती|साधना का पहला नियम मंत्र और अपने इष्ट देव पर पूर्ण श्रद्धा होती है| हम आपको हनुमान जी की इस साधना में अनिवार्य रूप से अपनाए जाने वाले अन्य नियमों के बारे में आगे बताते हैं|

साधना के नियम:- 
1. यह हनुमान जी की प्रत्यक्ष शाबर मंत्र साधना रात्रिकालीन साधना है| यह साधना रात 10 से 12 बजे के बीच में करनी है|
2. यदि आप हनुमान जी के प्रत्यक्ष दर्शन करना चाहते हो तो आपको साधना के लिए ऐसे स्थान का चयन करना पड़ेगा, यहाँ पर कम से कम 100 मीटर के घेरे में कोई और व्यक्ति निवास ना करता हो| हनुमान जी तभी अपने प्रत्यक्ष दर्शन दे सकते हैं जब आपके पास कोई और व्यक्ति ना हो| इसके लिए यदि किसी निर्जन स्थान पर स्थापित हनुमान मंदिर में साधना की जाए तो बहुत शीघ्र सफलता मिलती है| यदि आप अपने घर पर भी साधना करना चाहो तो कर सकते हो, मगर तब आपको अनुभूतियाँ या स्वपन में दर्शन तो होंगे मगर प्रत्यक्ष दर्शन नहीं हो सकते|इसका यह अर्थ नहीं है कि यदि आप घर पर साधना करोगे तो आप पर हनुमान जी प्रसन्न नहीं होंगे, सिर्फ आपको प्रत्यक्ष दर्शन नहीं हो सकते| 
3. साधना के बीच में और साधना के बाद भी ब्रह्मचर्य का पालन होना चाहिए| साधना के बाद सिर्फ अपनी पत्नी तक सीमित रहना है, नहीं तो सारी साधना निष्फल हो जाएगी|
4. साधना के लिए लाल आसन का प्रयोग करना है और मंत्र जप के लिए लाल मूंगे या रुद्राक्ष माला का प्रयोग करना है|
5. साधना पूर्वा या उत्तर दिशा की तरफ मुख करके करनी है| 
6. साधना किसी शुकल पक्ष के मंगलवार या रविवार से शुरू करनी है|
7. 40 दिन की साधना है और 40 दिन तक साधना का स्थान और सम्य रोज़ाना एक होना चाहिए|
8. रोज़ाना 5 माला जाप करना है|

साधना की विधि:- जिस दिन अपने साधना शुरू करनी है, उस दिन अपने व्रत रखना है और संध्या के सम्य एक लाल लंगोट, मीठा पान और हनुमान सिंदूर और चमेली का तेल किसी हनुमान मंदिर में जाकर चढ़ाने हैं| हनुमान सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर हनुमान जी को चढ़ाना है और हनुमान जी के आगे प्राथना करनी है कि मैं आज से आपकी कृपा पाने के लिए साधना आरंभ करने जा रहा हूं| कृपया मेरी साधना को सफलता प्रदान करना|
यहाँ पर बैठ कर आपने साधना करनी है, वहां अपने उस स्थान को अच्छी तरह से स्वच्छ कर लेना है उसके बाद अपने पूर्व या उत्तर दिशा की और किसी चौंकी पर लाल वस्त्र के ऊपर हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित करनी है| हनुमान जी की प्रतिमा के आगे देसी घी या चमेली के तेल का दीपक, धूप, भोग के लिए लडडू, जल का लोटा रखना है|
सबसे पहले गुरु पूजा करनी है, फिर गणेश पूजा और फिर अपने कुलदेवता की पूजा करनी है| इसके बाद अपने साधना के लिए संकल्प लेना है, संकल्प विधि के लिए हमारे पेज संकल्प की विधि पर क्लिक करें| संकल्प लेने के बाद आपने पूरी श्रद्धा के साथ मंत्र का जाप शुरू कर देना है| हनुमान जी के मंत्र की पांच माला रोज़ाना 40 दिन तक जाप करना है| यदि आपको बीच में कोई अनुभूति हो तो डरना नहीं है, निरंतर अपना जाप जारी रखना है| इसके बारे में किसी से भी बात नहीं करनी है|

हनुमान प्रत्यक्ष दर्शन शाबर मंत्र
Hanuman Darshan Shabar Mantra

ॐ हनुमान
बारह वर्ष के जवान
हाथ में लडडू, मुख में पान
आयो बाबा हनुमान
ना आयो तो दुहाई सिया-रामचंद्र की|

Om Hanuman
Barah Varsh ka jawan
Hath mein laddu, mukh mein paan
Aayo baba hanuman
Naa aayo to duhai Siya-Ram-chandra ki.

यह हनुमान जी के प्रत्यक्ष दर्शन पाने के लिए है| जितने दिन आपने साधना करनी है, उतने दिन अधिक से अधिक राम नाम का सिमरन करना है| राम नाम का सिमरन चलते-फिरते, काम करते, बैठते करते रहना है| राम नाम ही हनुमान जी की कृपा पाने की कुंजी है|
40 दिन साधना सम्पूर्ण होने के बाद भी रोज़ाना कम से कम एक माला रोज़ाना जाप करते रहना है| मंत्र सिद्धि निरंतर जाप करते रहने से ही मिलती है|
साधना के बीच या आखिर में इस मंत्र का दशांश हवन करना है| हवन की विधि के लिए आप हमारे पेज सरल हवन विधि पर क्लिक करके जानकारी हासिल कर सकते हो|

कुंडली दिखाए:- आप घर बैठे कुंडली का विश्लेषण करा सकते हो। सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण में लग्न कुंडली, चंद्र कुंडली, नवमांश कुंडली, गोचर और अष्टकवर्ग, महादशा और अंतरदशा, कुंडली में बनने वाले शुभ और अशुभ योग, ग्रहों की स्थिति और बल का विचार, भावों का विचार, अशुभ ग्रहों की शांति के उपाय, शुभ ग्रहों के रत्न, नक्षत्रों पर विचार करके रिपोर्ट तैयार की जाती है। सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण की फीस मात्र 500 रुपये है।  Whatsapp- 8360319129 Barjinder Saini (Master in Astrology)

Comments

Popular posts from this blog

कुंडली में महाभाग्य योग - Mahabhagya Yog in Kundali in hindi

कुंडली में महाभाग्य योग  Mahabhagya Yog in Kundali कुंडली में महाभाग्य योग- कुंडली में महाभाग्य योग एक ऐसा योग है जिसकी कुंडली में यह योग पूर्ण रूप से बनता है। वह व्यक्ति ज़िंदगी में हर मुकाम को प्राप्त करने की क्षमता रखता है। कुंडली में महाभाग्य योग बनने वाले व्यक्ति को ज़िंदगी में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं मगर फिर भी ऐसे व्यक्ति की किस्मत उसका ऐसा साथ देती है कि उसके सभी कार्य सम्पूर्ण जरूर होते हैं। ऐसा योग बनने वाले व्यक्ति कि बारे में दुनिया यदि सोच रखती है कि इस व्यक्ति की किस्मत बहुत अच्छी है। महाभाग्य योग पुरुष और स्त्री को दोनों की कुंडली में अलग-अलग नियमों से बनता है। हम आपको आगे महाभाग्य योग बनाने वाले सभी नियमों की जानकारी देते हैं और साथ कुंडली में यह योग भंग कैसे होता है उसकी जानकारी भी देते हैं।  पुरुष की कुंडली में महाभाग्य योग  पहला नियम - पहला नियम यह है कि कुंडली में महाभाग्य योग होने के लिए पुरुष की कुंडली में लग्न भाव, सूर्य और चंद्र ग्रह विषम राशिओं में होने चाहिए अर्थात इनकी राशि 1, 3, 5, 7, 9  और 11  होनी चाहिए।  जैसे आप ऊपर चित्र ...

कुंडली में शुभ कर्तरी योग - Shubh Kartari yoga in kundali in hindi

कुंडली में  शुभ कर्तरी योग  Shubh Kartari yoha in kundali in hindi शुभ कर्तरी योग क्या है (What is Shubh Kartari Yoga)- जब जन्म कुंडली के किसी भाव  से  एक भाव आगे और एक भाव पीछे सौम्य ग्रह बैठे हो तब उस भाव से शुभ कर्तरी योग बनता है।  यदि आपको सौम्य, क्रूर और पापी ग्रहों की जानकारी नहीं है तो आप हमारे पेज सौम्य और क्रूर ग्रह पर क्लिक करके प्राप्त कर सकते हो।  जिस भाव से शुभ कर्तरी योग बन रहा होता है यदि उस भाव में कोई ग्रह बैठा हो वह भी शुभ कर्तरी के प्रभाव में आ जाता है। जन्म कुंडली के जिस भाव में शुभ कर्तरी योग बनता है उस भाव के फलों की प्राप्ति बहुत कम संघर्ष करने पर ही हो जाती है और उस भाव से सम्बंधित फल बहुत सुगमता और शीघ्रता से प्राप्त होते हैं। ऐसे ही कुंडली के जिस भाव से भी शुभ कर्तरी योग बनता है उस भाव के फल बाहर शीघ्रता और सुगमता से प्राप्त होते हैं। हम आपको नीचे उदाहरण देकर समझते हैं कि जन्म कुंडली में कैसे शुभ कर्तरी योग बनता है और यह योग कब भंग हो जाता है। शुभ कर्तरी योग कैसे बनता है - How is Shubh Kartari yoga formed? जैसे आप ऊपर दिए हु...

माँ काली चालीसा - Maa Kali Chalisa in hindi

माँ काली चालीसा  Maa Kali Chalisa in hindi दोहा  जय जय सीताराम के मध्यवासिनी अम्ब, देहु दर्श जगदम्ब अब, करो न मातु विलम्ब, जय तारा जय कलिका जय जय विद्या वृन्द,  काली चालीसा रचित एक सिद्धि कवि हिन्द,  प्रातः उठ जो पढ़े, दुपहरिया या शाम,  दुःख दरिद्र दूर हो, सिद्ध होए सब काम।  चालीसा  जय काली कंकाल मालिनी, जय मंगला महा कपालिनी।  रक्तबीज बधकारिणी माता, सदा भक्त-जन की सुखदाता।  शिरो मालिका भूषित अंगे, जय काली जय मध्य मतंगे।  हर हृदा रविन्द सविलासिनी, जय जगदम्बा सकल दुःख नाशिनी।  ह्रीं काली श्रीं महा कराली, क्रीं कल्याणी दक्षिण काली।  जय कलावती जय विद्यावती, जय तारा सुंदरी महामति।  देहु सबुद्धि हरहु सब संकट, होहु भक्त के आगे प्रगट।  जय ओमकारे जय हुंकारे, महाशक्ति जय के अपरम्पारे।  कमला कलयुग दर्प विनाशिनी , सदा भक्तजन के भयनाशिनी।  अब जगदम्ब ना देर लगावहु, दुःख-दरिद्रता मोर हटावहु। जयति कराल कलिका माता, कालानल समान धूतिगाता।  जयशंकरी शुरेशि सनातनि, कोटि सिद्धि कवि मातु पुरा तनि।  कपर्दिनी कलि कल्प बिमोचि...

कुंडली में केमद्रुम योग का प्रभाव - kemdrum yog in kundali in hindi

कुंडली में केमद्रुम योग का प्रभाव  Kemdrum yog effect and remedies in hindi कुंडली में केमद्रुम योग का प्रभाव - कुंडली में कई तरह के अच्छे और बुरे योग बनते हैं। उनमें से एक केमद्रुम योग है जो कि एक बहुत बुरा योग है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में यह योग बनता है तो उस व्यक्ति का मन सदैव संसार से उखड़ा रहता है अर्थात उसका मन किसी भी कार्य में नहीं लगता है। उसको ज़िंदगी में अकेला महसूस होता है और ऐसे व्यक्तिओं को किसी भी क्षेत्र में महारथ हासिल करने में बहुत मुश्किल होती है। केमद्रुम योग बनने से व्यक्ति को ज़िंदगी में आगे बढ़ने में बहुत मुश्किल होती है। जिन कुंडलियों में यह योग बनता दिखाई देता है, यदि उन कुंडलिओं में सभी नियम लगाकर देखे जाए तो ज्यादातर कुंडलिओं में यह केमद्रुम योग भंग हो जाता है। हम आपको आगे सभी नियम बताकर समझाते हैं कि कुंडली में केमद्रुम योग बनता कैसे हैं और यह योग भंग कैसे होता हैं।  केमद्रुम योग क्या है - केमद्रुम योग को हमेशा चंद्र कुंडली से देखना चाहिए। यदि चंद्र कुंडली में लग्न भाव में चंद्र ग्रह अकेला बैठा हो और उससे दूसरे भाव अर्थात अगले भाव म...

कुंडली में गजकेसरी योग का निर्माण- Gajakesari Yoga in kundali in hindi

कुंडली में गजकेसरी योग का निर्माण Gajakesari Yoga in kundali in hindi गजकेसरी योग क्या है (What is Gajkesari Yog)- कुंडली में गुरु और चंद्र ग्रह से गजकेसरी योग बनता है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु और चंद्र ग्रह किसी भाव में एक साथ बैठे हो या जन्म कुंडली में गुरु ग्रह से चंद्र चौथे, सातवें या दसवें भाव में हो तब गजकेसरी योग का निर्माण होता है। मगर यह योग बनने के लिए काफी नियम लागू होते हैं। यदि जन्म कुंडली में यह नियम और शर्तें पूरी होती हैं तभी प्रबल योग समझा जाता है अन्यथा सिर्फ कुंडली में गुरु और चंद्र ग्रह की युति या गुरु से चौथे, सातवें या दसवें घर में चंद्र के बैठने से यह योग नहीं बनता है। हम आपको आगे गजकेसरी योग बनाने वाले नियम की पूर्ण जानकारी देते हैं।  गजकेसरी योग का अर्थ होता है जैसे हाथिओं के झुंड में अकेला शेर चलता है। यह योग चंद्र पर गुरु के प्रभाव से बनता है। जैसे आपको पता है चंद्र हमारे मन का कारक है और जब चंद्र पर गुरु का ऐसा प्रभाव या युति बनती है तो गुरु के कारकत्व व्यक्ति के मन को प्रभावित करते हैं। कुंडली में ऐसा योग बनने वाले व्यक्ति ...