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Lesson-13, Kaal sarp dosh or yog , काल सर्प दोष या योग क्या है

काल सर्प दोष की पहचान और निवारण
Kaal Sarp Dosh or Yog

Kaal sarp dosh nivaran, काल सर्प दोष, what is kaal sarp dosh

हमारे यहाँ काफी ढोंगी ज्योतिषों की तरफ से काल सर्प दोष या योग के बारे में तरह-तरह की भ्रांतियां बना कर लोगों से पूजा के नाम पर पैसे ऐंठे जाते हैं, जबकि ज्यादातर लोगों की कुंडली में काल सर्प दोष होता भी नहीं है| कुंडली में काल सर्प दोष को देखने के लिए कुछ सिद्धांत लागू होते हैं और उन सिद्धांतो की सभी शर्तें पूरी होने पर ही काल सर्प दोष माना जाता है| कुछ सिद्धांत या शर्तें ऐसी भी होती है, जिससे कुंडली में काल सर्प दोष भंग हो जाता है|
हम आपको आगे काल सर्प दोष लागू होने के सिद्धांत, काल सर्प दोष के प्रकार और काल सर्प दोष के निवारण के बारे में विस्तार से बताते हैं|

नोट:- *  कुंडली में काल सर्प दोष के बारे में जानने से पहले आपको कुंडली में राहु और केतु की उच्च राशि, नीच राशि, मित्र राशि और शत्रु राशि का ज्ञान होना आवश्यक है, इसके बिना आप काल सर्प दोष के बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त नहीं कर सकते| कुंडली में राहु और केतु की स्थिति के बारे में जानने के लिए आप पहले हमारे पेज Kundali Mein Rahu Ketu पर क्लिक करके पूर्ण जानकारी हासिल कर सकते हो|


* कुंडली में राहु और केतु हमेशा समान्तर चलते हैं| यदि राहु प्रथम भाव में होगा तो केतु उससे सात भाव आगे सप्तम भाव में होगा ऐसे ही अगर राहु दूसरे भाव में बैठा होगा तो केतु उससे सात भाव आगे आठवें भाव में होगा|
* कुंडली में काल सर्प योग बनने पर यदि राहु और केतु मित्र राशि में बैठे होंगे तो अच्छा फल देंगे और यदि शत्रु राशि या नीच राशि में बैठे होंगे तो वहां पर अपना बुरा फल देंगे| यदि राहु और केतु कुंडली में 3, 6, 8, 12 भाव में से किसी एक भाव में अपनी मित्र राशि या उच्च राशि में भी बैठे होंगे तो फिर बुरा फल ही देंगे| कुंडली में काल सर्प योग बनने पर राहु और केतु अपनी स्थिति के अनुसार अच्छा या बुरा फल देते हैं| यह कभी नहीं होता कि कुंडली में काल सर्प योग बनने पर व्यक्ति को बुरे फल ही मिलते हैं|

पहला सिद्धांत या शर्त 

आपने यह तो जान लिया कि कुंडली में राहु और केतु एक-दूसरे से समान्तर चलते हैं| यदि कुंडली में राहु और केतु के एक तरफ सभी गृह आ जाएं और दूसरी तरफ सभी भाव खाली हो तो काल सर्प दोष या योग बनने की पहली शर्त पूरी हो जाती है| इसकी आपको नीचे उदाहरण देखकर समझाते हैं|
काल सर्प दोष,
Kaal sarp dosh nivaran

आप ऊपर चित्र नंबर 1 में देख रहे हो कि यहाँ कुंडली में राहु द्रितीय भाव में बैठे हैं और केतु अष्टम भाव में बैठे हुए हैं| यहाँ पर आप देख सकते हो कि राहु और केतु की एक तरफ सभी गृह आ गए हैं और दूसरी तरफ सारे भाव खाली हैं|


ऐसे ही इसकी दूसरी उदाहरण आप देख सकते हो कि चित्र नंबर 2 में चतुर्थ भाव में केतु हैं और दशम भाव में राहु बैठे हैं| यहाँ पर भी राहु और केतु की एक तरफ सभी गृह बैठे हुए हैं और दूसरी तरफ सारे भाव खाली हैं अर्थात वहां पर कोई गृह नहीं हैं| यह काल सर्प योग बनने की पहली शर्त पूरी होती है| इस तरह यदि कुंडली में राहु और केतु की एक तरफ सभी गृह आ जाएं तो उसे काल सर्प दोष या योग कहा जाता है| हमने आपको जैसे पहले भी बताया है कि काल सर्प योग बनने का यह अर्थ नहीं होता कि कुंडली में सदैव राहु केतु बुरा फल देते हैं बल्कि काल सर्प योग बनने से राहु और केतु बलवान हो जाते हैं और वह अपना दोगुना अच्छा या बुरा फल देते हैं|

दूसरा सिद्धांत या शर्त

यदि आपकी कुंडली में पहला सिद्धांत लागू हो जाता है तो आप जान जाएंगे कि आपकी कुंडली में काल सर्प योग है| अब आपको दूसरी बात यह देखनी होती है कि कुंडली में राहु और केतु कौन से भाव और कौन सी राशि के साथ बैठे हैं| यदि राहु और केतु कुंडली में मित्र राशि या उच्च राशि के साथ बैठे हैं तो आपकी कुंडली में काल सर्प योग आपको अच्छे फल प्रदान करेगा और यदि शत्रु राशि या नीच राशि में बैठे होंगे तो आपको बुरे फल प्रदान करेंगे| इसके अतिरिक्त यदि राहु और केतु में से कोई गृह कुंडली के 3, 6, 8, 12 भाव में से किसी एक भाव में मित्र राशि या उच्च राशि के साथ भी बैठे हैं तो आपको कुंडली के इन भावों में बुरे फल ही मिलेंगे| काल सर्प योग बनने पर यदि राहु शत्रु राशि में बैठा हैं और केतु मित्र राशि के साथ किसी अच्छे भाव में बैठे हैं तो यहाँ पर काल सर्प योग बनने पर राहु बुरे फल देगा जबकि केतु अच्छे फल देगा| यहाँ पर आपको सिर्फ राहु की शांति करनी है और केतु की बिलकुल नहीं करनी|
फिर से आपको बताते हैं कि कुंडली में राहु और केतु की स्थिति का ज्ञान नहीं होने पर आप कुंडली में यह निर्धारित नहीं कर सकते हो कि आपको काल सर्प योग की स्थिति बनने पर कुंडली में राहु और केतु कब बुरे फल देंगे और कब अच्छे फल देंगे| इसके लिए आप हमारे पेज Kundali mein rahu aur ketu पर क्लिक करके पहले इसकी जानकारी हासिल कर लें|


तीसरा सिद्धांत या शर्त 


यदि आपकी कुंडली में ऊपर बताए सिद्धांत लागू हो जाते हैं तो आप यह जान सकते हो कि कुंडली में काल सर्प योग बनता है के नहीं और यदि बनता है तो वह अच्छे फल देगा या बुरे फल देगा|
अब अपने देखना है कि कुंडली में राहु और केतु का अंश(Degree) कितनी है| राहु और केतु का अंश(Degree) कुंडली में हमेशा एक बराबर होती है| यदि कुंडली में राहु 11° अंश(Degree) पर बैठा है तो केतु भी 11° अंश(Degree) पर ही बैठा होगा|
कुंडली में अंश(Degree) का बहुत महत्व होता है| इससे हमें यह पता चलता है कि कुंडली में कोई गृह कितनी शक्ति या बल के साथ बैठा है| कुंडली में प्रत्येक गृह 0° डिग्री से लेकर 30° डिग्री तक चलता है| 0° से 5° डिग्री तक कोई गृह बैठा हो तो वह एक बच्चे की भांति बल रखता है अर्थात अपना अच्छा या बुरा फल सिर्फ 25% देने में समर्थ होता है| 5° से 10° डिग्री तक कोई गृह बैठा हो तो वह एक कुमार(बालक) जितना बल रखता है अर्थात 50% फल देने में समक्ष होता है| कुंडली में 10° से 20° तक गृह पूरे बल में होता है| यहाँ पर वह कुंडली में 100% अच्छे या बुरे फल देता है| 20° से 25° तक कोई गृह बैठा हो यहाँ पर भी वह 50% फल देता है| 25° से 30° तक गृह बिलकुल वृद्ध अवस्था में पहुँच जाता है| यहाँ पर वह अपने 25% अच्छे या बुरे फल देता है| 

इन तीन सिद्धांतों को अपनी कुंडली पर लागू करके देख सकते हो कि आपकी कुंडली में काल सर्प योग बन रहा है कि नहीं| यदि बन रहा है तो कुंडली में राहु या केतु अच्छे फल देंगे या बुरे फल देंगे|


काल सर्प दोष का निवारण(Kaal sarp dosh nivaran ja upaye):- 

कुंडली में काल सर्प योग या दोष की स्थिति बनने पर आपको यदि राहु और केतु में से जो गृह कुंडली के किसी बुरे भाव में या किसी शत्रु या नीच राशि में बैठा है तो आप उसका समाधान पूजा अथवा दान से कर सकते हो और यादो कोई गृह किसी अच्छे भाव में मित्र राशि के साथ बैठा है तो आपको पूजा या किसी दान की कोई आवश्यकता नहीं होती है|
यदि  कुंडली में काल सर्प दोष या योग बनने पर राहु बुरे फल देने वाला गृह है तो आप उसके बीज मंत्र ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः (Om Bhram Bhareem Bhrom sah Rahve Namha) का शनिवार या रोज़ाना जाप करें| इसकी शनि के लिए आप शनिवार को किसी गरीब(जरूरतमंद) व्यक्ति को काले रंग का जूता, तिल, उड़द की दाल काला वस्त्र का दान करें| काले कुत्ते को दूध पिलाएं और चलते पानी में सिक्का धातु को राहु का मंत्र बोलते होये प्रवाहित करें| इससे कुंडली में राहु शांत होते हैं|


यदि कुंडली में केतु गृह अशुभ बैठे हों तो आप इस मंत्र का जाप करें:- ॐ स्त्रां स्त्रीं स्त्रौं सः केतवे नमः का जाप करें| इसके अतिरिक्त यदि आप गणेश भगवान का पूजन करें तो बहुत अच्छे प्रभाव देखने को मिलते हैं| गणेशाय भगवान केतु के आराध्य देवता हैं| काले कुत्ते को दूध डालें| 
यदि कुंडली में राहु और केतु दोनों गृह शत्रु राशि या बुरे भाव में बैठे हों तो आप इस नाग गायत्री मंत्र की रोज़ाना एक माला जाप करें- ॐ नवकुलाय: विधमहे विषदंताये धीमहि तन्नो: सर्प प्रचोदयात| इसके अतिरिक्त यदि आप महां-मृत्यंजय का जाप करें तो बहुत लाभ मिलता है|नाग मंदिर में चांदी के नाग की जोड़ी चढ़ाए, मोरपंख की पक्खी से हवा लें|

कुंडली दिखाए:- आप घर बैठे कुंडली का विश्लेषण करा सकते हो। सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण में लग्न कुंडली, चंद्र कुंडली, नवमांश कुंडली, गोचर और अष्टकवर्ग, महादशा और अंतरदशा, कुंडली में बनने वाले शुभ और अशुभ योग, ग्रहों की स्थिति और बल का विचार, भावों का विचार, अशुभ ग्रहों की शांति के उपाय, शुभ ग्रहों के रत्न, नक्षत्रों पर विचार करके रिपोर्ट तैयार की जाती है। सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण की फीस मात्र 500 रुपये है।  Whatsapp- 8360319129 Barjinder Saini (Master in Astrology)    

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Comments

  1. मेष लग्न की कुंडली मे चतुर्थ भाव मे केतू अपनी नीच राशि कर्क के साथ केंद्र भाव मे बैठ कर बुरा फल देने वाला होगा या अच्छा

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    1. सबसे पहले उत्तर देरी से देने के लिए क्षमा चाहता हूं| आपने पूछा है कि मेष लग्न की कुंडली में चतुर्थ भाव में केतु क्या परिणाम देगा| सबसे पहली बात यह कि लग्न कुंडली में राहु और केतु की स्थिति जानने से पहले आप इनकी उच्च और नीच राशि को भूल जाइए| राहु और केतु की अपनी कोई राशि नहीं होती यह बात तो आपको मालुम होगी, आपको बता दें के राहु और केतु का परिणाम देखने के लिए सबसे पहले यह जानना बहुत जरुरी होता है कि राहु और केतु जिस राशि में बैठे हैं उस राशि के स्वामी ग्रह की कुंडली में क्या स्थिति है, यदि कुंडली में उसकी स्थिति अच्छी है तो ज्यादातर राहु-केतु अपना अच्छा परिणाम देते हैं और यदि बुरी स्थिति हो तो परिणाम भी बुरे मिलते हैं,, दूसरी बात यह देखनी होती है कि राहु या केतु जिस राशि में बैठे हैं क्या उस राशि के स्वामी ग्रह को दृष्ट तो नहीं कर रहे हैं या उस राशि का स्वामी ग्रह इनको दृष्ट तो नहीं कर रहा है,, यदि राहु या केतु जिस राशि में हों और उसके स्वामी को अपनी पूर्ण दृष्टि से देख रहें हों तो कुंडली के उस भाव और उस ग्रह से सबंधित बुरे परिणाम मिलते है, इसी तरह से आप सबसे पहले यह बात भूल जाइए के कर्क राशि का स्वामी चंद्र केतु का शत्रु ग्रह है बल्कि लग्न कुंडली में यह देखिए कि कहीं चतुर्थ भाव में केतु के साथ चंद्र तो नहीं बैठा या केतु अपनी 5वी , 7वी और 9वी दृष्टि से तो नहीं देख रहा,, फिर कुछ चिंता की बात हो सकती है, और तब केतु की शांति हेतु इसका दान या इसके बीज मंत्र का जाप करना चाहिए

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