Skip to main content

Lesson-11 कुंडली में गोचर क्या होता हैं - Gochar in kundali

कुंडली में गोचर क्या होता हैं?
What is Gochar in kundli?

Gochar ka arth, gochar meaning, gochar grah

कुंडली में गोचर(Kundli mein Gochar):-कुंडली में गोचर को जानने से पहले आप कुंडली के 12 भावों की जानकारी प्राप्त कर लेते हो तो आप गोचर के बारे में अच्छी तरह से समझ सकोगे| यदि आप इस विष्य को अंत तक ध्यान से पढ़ोगे तो आपको गोचर और ग्रहों की चाल की पूरी जानकारी प्राप्त हो जाएगी|
ज्योतिष विज्ञान में जो कुंडली होती है, असल में वह हमारा आकाश-मंडल होता है और उस आकाश-मंडल को 12 भागों में बांटा गया है|आपने कुंडली में देखा होगा कि कुंडली में 12 भावों में 12 नंबर लिखे होते हैं| यह नंबर राशिओं के नंबर होते हैं और इससे हमें पता चलता है कि कुंडली के किस भाव में कौन सी राशि विराजमान है|
इस आकाश-मंडल में सभी गृह अपनी कक्षा में 360° अंश(Degree) में भ्रमण करते हैं और इस आकाश-मंडल को 12 राशियों में बांटा गया है तो प्रत्येक राशि में गृह 360°/12=30° अंश(Degree) तक चलता(भ्रमण) है|
सभी गृह आकाश मंडल में 360°अंश(Degree) का अपना एक चक्कर अलग-अलग सम्य में पूरा करते हैं|जैसा आपने ऊपर पढ़ा कि इस आकाश मंडल के 360° डिग्री के चक्कर को 12 राशियों में बांटा गया है और इस तरह से सभी गृह एक राशि में 30° अंश(Degree) तक चलते हैं और फिर अगली राशि में 0° डिग्री से 30° डिग्री तक चलते हैं और सभी गृह कुंडली या आकाश-मंडल में अपना एक चक्कर 360° का लगाते हैं|
कुंडली में सभी गृह एक राशि से दूसरी राशि तक के सफर को अलग-अलग सम्य में पूरा करते हैं| कुंडली में चंद्र सबसे तेज़ गति से चलने वाला गृह होता है| यह एक राशि से दूसरी राशि अर्थात 30° डिग्री का सफर सवा दो दिन(54 घंटों) में पूरा कर लेता है| वहीं शनि सबसे धीमी गति से चलने वाला गृह कुंडली में एक राशि से दूसरी राशि अर्थात 30°अंश(Degree) का सफर 2.5 वर्ष(30 माह) में पूरा करता है| जब किसी राशि में शनि प्रवेश करता है तो 2.5 वर्ष तक वहां रहता है, तब कहा जाता है कि इस राशि वाले के ऊपर शनि का ढैया शुरू हो चुका है|हम आपको नीचे बताते हैं कि सभी गृह गोचर में एक राशि से दूसरी राशि तक पहुँचने में कितना सम्य लगाते हैं|

कुंडली में एक राशि में ग्रहों की चाल की अवधि

गृह               गोचर में चलने की अवधि
सूर्य               30 दिन
चंद्र               सवा दो दिन(54 घंटे)
मंगल          1.5 से 3 माह
बुध             27 दिन     
गुरु             12 माह
शुक्र            23 दिन करीब
शनि            2.5 वर्ष(30 माह)
राहु             18 माह
केतु             18 माह

सभी गृह ऊपर बताए सम्य में अपनी राशि बदल लेते हैं|
गोचर का अर्थ(Gochar Meaning):- आपने ऊपर पढ़ा है कि किस प्रकार कुंडली में सभी गृह एक राशि से दूसरी राशि में चलते हैं|कुंडली में ग्रहों के चलने की गति और उनकी वर्तमान स्थिति को ही गोचर कहा जाता है|कुंडली में गोचर से हम देखते हैं कि वर्तमान स्थिति में सभी गृह कुंडली की कौन सी राशि में कौन से भाव में भ्रमण कर रहें हैं|

गोचर कैसे देखें(Gochar Kaise Dekhe)

Kundali gochar grah, online free astrology classes in hindi,

Online free astrology classes in hindi,  free online astrology course in hindi

गोचर देखने के लिए आप आपने मोबाइल में गूगल प्लेस्टोर से कोई भी कुंडली देखने का सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर लीजिए| जैसा आप चित्र नंबर 1 में देख रहे हो कि वहां पर आपने नाम के स्थान पर गोचर लिख देना है, जो वर्तमान आज की तिथि होती है, उसको तिथि के कालम में दर्ज़ कर देना है, वर्तमान सम्य को दर्ज़ कर देना है, अपने शहर का नाम दर्ज़ करना है, नीचे पुरष ही रहने दें, यह सब विवरण दर्ज़ करने के बाद आपने कुंडली दिखाए पर क्लिक करना है| इसके बाद आपके सामने जैसे चित्र नंबर 2 में देख रहे हो,  ऐसी लगन कुंडली खुल जाएगी| यही आपके ग्रहों के गोचर अर्थात ग्रहों की वर्तमान स्थिति होगी|यहाँ पर आप देख सकते हो कि कोई गृह किस राशि और किस भाव में भ्रमण कर रहा है|
जैसा आप ऊपर चित्र नंबर 2 में गोचर(वर्तमान) कुंडली देख रहे हो कि यहाँ पर केतु गृह कुंडली के तृतीय भाव में राशि नंबर 9(धनु) में भ्रमण कर रहा हैं, गुरु और शनि चतुर्थ भाव में राशि नंबर 10(मकर) में भ्रमण कर रहें हैं|चंद्र और मंगल गृह पंचम भाव में राशि नंबर 11(कुंभ) में भ्रमण कर रहें हैं| बुध, सूर्य और शुक्र गृह अष्टम भाव में राशि नंबर 2(वृष) में भ्रमण कर रहें हैं| राहु गृह नवम भाव में राशि नंबर 3(मिथुन) में भ्रमण कर रहें हैं| यह कुंडली में ग्रहों के वर्तमान सम्य की स्थिति होती है| अब आपको बताते हैं के गोचर का कुंडली में विश्लेषण कैसे करते हैं|

कुंडली में गोचर का विश्लेषण :- जब हम किसी कुंडली का विश्लेषण करते हैं तो सबसे पहले हम व्यक्ति की जन्म लग्न कुंडली में ग्रहों की स्थिति देखते हैं कि उस व्यक्ति के जन्म के सम्य में ग्रहों की स्थिति क्या थी अर्थात सभी गृह जन्म के सम्य कुंडली के किस भाव में कौन सी राशि के साथ बैठे हुए हैं| इससे हमें यह पता चल जाता है कि कुंडली में कौन सा योग कारक गृह(मित्र) है और कौन सा गृह मारक(शत्रु) है|इसको हम लग्न कुंडली कहते हैं|
जब हमें गहराई से कुंडली का विश्लेषण करना होता है तो हम कुंडली में ग्रहों की वर्तमान स्थिति देखते हैं, जैसा आपको ऊपर बताया गया है| इसको हम गोचर कहते हैं| मान लो आपके पास कोई कुंडली का विश्लेषण कराने के लिए आया है और उसने अपने कारोबार के बारे में पूछना है| तो सबसे पहले आप जन्म लग्न कुंडली में दशम(भाव) में ग्रहों की स्थिति देखोगे और उसके बाद आप गोचर में जाकर देखोगे के इस सम्य वर्तमान में कुंडली के गोचर में दशम(10) भाव में कौन सा गृह चल रहा है| यदि गोचर में लग्न कुंडली का कोई मारक गृह दशम(10) भाव में चल रहा होगा तो वह गृह आपके कारोबार या नौकरी में बाधा खड़ी कर देगा और यदि जन्म कुंडली का कोई योग कारक गृह चल रहा होगा तो वह अच्छे फल प्रदान करेगा|

याद रहें जन्म लग्न कुंडली में जो गृह योग कारक(मित्र) होंगे वह गोचर में भी अच्छे फल ही देंगे चाहे वह गोचर में त्रिक(6, 8, 12) भाव में बैठे हो या अपनी नीच राशि में बैठे हों और जो गृह जन्म लग्न कुंडली में मारक गृह (शत्रु) होंगे वह गोचर में भी बुरे फल ही देंगे, चाहे वह अपनी उच्च राशि या किसी अच्छे भाव में बैठे हों|

कुंडली दिखाए:- आप घर बैठे कुंडली का विश्लेषण करा सकते हो। सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण में लग्न कुंडली, चंद्र कुंडली, नवमांश कुंडली, गोचर और अष्टकवर्ग, महादशा और अंतरदशा, कुंडली में बनने वाले शुभ और अशुभ योग, ग्रहों की स्थिति और बल का विचार, भावों का विचार, अशुभ ग्रहों की शांति के उपाय, शुभ ग्रहों के रत्न, नक्षत्रों पर विचार करके रिपोर्ट तैयार की जाती है। सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण की फीस मात्र 500 रुपये है।  Whatsapp- 8360319129 Barjinder Saini (Master in Astrology)    

यदि आप घर बैठे फ्री में ज्योतिष शास्त्र सीखना चाहते हो तो हमारे पेज Free Astrology Classes in Hindi पर क्लिक करें|






Comments

Popular posts from this blog

Lesson-4 कुंडली के बारह भाव, Kundli ke 12 bhav

  कुंडली के बारह भाव (Kundali ke 12 bhav) चित्र नंबर.1 यह जो आप ऊपर कुंडली के बारह भाव देख रहे हो, असल में यह आकाश को बारह भागों में बांटा गया है| ज्योतिष विज्ञान में आकाश के 360° अंश(Degree) के नक़्शे को कुंडली के बारह भावों को बारह राशिओं में बांटा गया है और प्रत्येक भाव किसी एक राशि का भाव होता है| पंचांग के द्वारा किसी व्यक्ति के जन्म के सम्य और स्थान के मुताबिक उस सम्य ग्रहों की स्थिति के अनुसार व्यक्ति की जन्म लग्न कुंडली बनाई जाती है और उस सम्य अथवा स्थान के हिसाब से उस सम्य जो ग्रहों और राशिओं की स्थिति होती है उसको इस लगन कुंडली में लिखा जाता है| प्रत्येक भाव में कोई गृह 30° अंश(Degree) तक चलता है और फिर अगले भाव में चला जाता है, अंश(Degree) के बारे में हम आगे पढ़ेंगे| कुंडली देखने के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण जन्म लगन कुंडली होती है इसके साथ ही हम व्यक्ति की जन्म के सम्य के ग्रहों की स्थिति देख सकते हैं|ऊपर जैसे हमने कुंडली दिखाकर बताया है के भावों को कुंडली में लिखते कैसे हैं, अपने इस प्रथम भाव से द्वादश भाव तक कैसे क्रमांक इन भावों की गणता करनी है यह अच्छी तरह ...

पन्ना रत्न धारण करने के लाभ - Emerald (Panna) stone benefits in hindi

पन्ना रत्न धारण करने के लाभ Emerald stone benefits in hindi पन्ना रत्न के लाभ और पहचान (Benefits of Emerald Stone):-  पन्ना रत्न बुध ग्रह का रत्न होता है। इस रत्न को बुध ग्रह के बल को बढ़ाने के लिए धारण किया जाता है। बुध ग्रह हमारी बुद्धि का कारक ग्रह होता है और इसके रत्न पन्ना को धारण करने से हमारी बुद्धि का बल बढ़ता है और हमारी समरण शक्ति बढ़ती है। पन्ना रत्न धारण करने से व्यक्ति को ज्योतिष, पत्रकारी, शिक्षक, वकालत के क्षेत्र में लाभ मिलता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध सूर्य से अस्त हो या बलहीन हो तब इसका रत्न पन्ना को धारण करने से बुध ग्रह को बल मिलता है।   इसके अतिरिक्त बुध ग्रह कुंडली के जिस भाव में बैठा हो, जिन भावों में उसकी मिथुन और कन्या राशि हो और जिन भाव पर बुध की दृष्टि हो, पन्ना रत्न धारण करने से उन भावों के फलों में वृद्धि होती है।  रत्न क्यों धारण करना चाहिए ?  -    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति अपने पिछले जन्म के संचित कर्मों को साथ लेकर जन्म लेता है और उसके पिछले जन्म के संचित कर्मों के मुताबिक उसकी जन्म कुंडली का नि...

बटुक भैरव मंत्र साधना सम्पूर्ण विधि - Batuk Bhairav Mantra Sadhna

बटुक भैरव मंत्र साधना Batuk Bhairav Mantra Sadhna  बटुक भैरव बहुत ही शीघ्र प्रसन्न होने वाले और तुरंत फल देने वाले देवता हैं। यह दुर्गा माता के लाडले पुत्र और शिव के अवतार हैं। यदि इनको अपना इष्ट बनाकर इनकी साधना प्रारम्भ की जाए तो आपकी ज़िंदगी के सभी कष्ट धीरे-धीरे ख़तम होने लगते हैं। नवग्रहों में से किसी भी गृह का दोष कुंडली में चल रहा हो आप बटुक भैरव जी के मंत्र की साधना करके उसका निवारण कर सकते हो।  यदि कोई साधक इनको अपना इष्ट मानकर रोज़ाना इनके मंत्र का जाप श्रद्धा और विश्वास के साथ करने लग जाता है तो बटुक भैरव जी आठों पहर (24 घंटे) उसकी छाया की तरह साथ रहकर रक्षा करते हैं। बटुक भैरव जी का जिस घर में मंत्र जाप रोज़ाना होता हो वहां पर जादू-टोना या कोई भी बुरी शक्ति का प्रभाव नहीं रहता है। बटुक भैरव जी का तीनों लोक में ऐसा प्रभाव है कि काल भी इनके नाम से कांपता है। बटुक भैरव मंत्र साधना के कुछ दिनों के बाद ही व्यक्ति को अनुभूतियाँ होनी शुरू हो जाती हैं। साधना के दौरान कई तरह के चमत्कार होने शुरू हो जाते हैं। यह सब बातें मैं अपने खुद के अनुभव से लिख रहा हूं। मैंने जिस विधि से बट...

हवन की विधि और महत्व, Havan ki vidhi

हवन की विधि और महत्व Hawan Vidhi at home हवन शुरू करने की विधि और मंत्र (Havan shuru karne ka mantra aur vidhi)-  कई साधक ऐसे होते हैं जो हवन करने की जटिल प्रक्रिया, मुश्किल से मिलने वाली सामग्री और संस्कृत के कठिन श्लोकों के कारण हवन नहीं कर पाते हैं| हम आपको यहाँ हवन की बहुत सरल विधि बताएंगे, इस विधि से आप खुद आसानी से मिलने वाली सामग्री के साथ हवन कर सकते हैं| यह जो विधि बताई जा रही है इसका प्रयोग शांति कर्म और देव हवन के लिए करना है| नवग्रह हवन, तामस हवन और कौड़ा हवन का प्रयोग अलग विधि और सामग्री से होता है| इसके लिए आप अलग से हमारे ब्लॉग पर विधि विधान देख सकते हो|  हवन का महत्व- हिन्दू धर्म में हवन का बहुत महत्व है| हिन्दू धर्म में 4 प्रमुख यज्ञ का वर्णन है, उसमें से हवन यज्ञ या देव यज्ञ को सबसे प्रमुख स्थान प्राप्त है| हिन्दू धर्म में 4 यज्ञ का नाम मनुष्य यज्ञ, पितर यज्ञ, भूत यज्ञ और देव यज्ञ है,  इसमें मनुष्य यज्ञ पृथ्वी के लोगों की भलाई के लिए किया जाता है, पितर यज्ञ स्वर्ग सिधार चुके पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है, भूत यज्ञ पृथ्वी के पशु-पक्षिय...

कुंडली में महाभाग्य योग - Mahabhagya Yog in Kundali in hindi

कुंडली में महाभाग्य योग  Mahabhagya Yog in Kundali कुंडली में महाभाग्य योग- कुंडली में महाभाग्य योग एक ऐसा योग है जिसकी कुंडली में यह योग पूर्ण रूप से बनता है। वह व्यक्ति ज़िंदगी में हर मुकाम को प्राप्त करने की क्षमता रखता है। कुंडली में महाभाग्य योग बनने वाले व्यक्ति को ज़िंदगी में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं मगर फिर भी ऐसे व्यक्ति की किस्मत उसका ऐसा साथ देती है कि उसके सभी कार्य सम्पूर्ण जरूर होते हैं। ऐसा योग बनने वाले व्यक्ति कि बारे में दुनिया यदि सोच रखती है कि इस व्यक्ति की किस्मत बहुत अच्छी है। महाभाग्य योग पुरुष और स्त्री को दोनों की कुंडली में अलग-अलग नियमों से बनता है। हम आपको आगे महाभाग्य योग बनाने वाले सभी नियमों की जानकारी देते हैं और साथ कुंडली में यह योग भंग कैसे होता है उसकी जानकारी भी देते हैं।  पुरुष की कुंडली में महाभाग्य योग  पहला नियम - पहला नियम यह है कि कुंडली में महाभाग्य योग होने के लिए पुरुष की कुंडली में लग्न भाव, सूर्य और चंद्र ग्रह विषम राशिओं में होने चाहिए अर्थात इनकी राशि 1, 3, 5, 7, 9  और 11  होनी चाहिए।  जैसे आप ऊपर चित्र ...

बाबा कालीवीर चालीसा और आरती, Baba Kaliveer ji Chalisa Aarti

बाबा कालीवीर चालीसा और आरती  कालीवीर चालीसा  काली-पुत्र का नाम ध्याऊ, कथा विमल महावीर सुनाऊ| संकट से प्रभु दीन उभारो, रिपु-दमन है नाम तिहारो| विद्या, धन, सम्मान की इच्छा, प्रभु आरोग्य की दे दो भिक्षा| स्वर्ण कमल यह चरण तुम्हारे, नेत्र जल से अरविंद पखारे| कलिमल की कालिख कटे, मांगू मैं वरदान|  रिद्धि-सिद्धि अंग-संग रहे,  सेवक लीजिए जान| श्री कुलपति कालीवीर प्यारे,  कलयुग के तुम अटल सहारे|  तेरो बिरद ऋषि-मुनि हैं गावें,  नाम तिहारा निसदिन धयावे| संतों के तुम सदा सहाई,  ईश पिता और कलिका माई| गले में तुम्हारे हीरा सोहे,  जो भक्तों के मन को मोहे| शीश मुकट पगड़ी संग साजे,  द्वार दुंदुभी, नौबत बाजे| हो अजानुभुज प्रभु कहलाते,  पत्थर फाड़ के जल निसराते| भुजदंड तुम्हारे लोह के खम्भे,  शक्ति दीन्ह तुम्हे माँ जगदम्बे| चरणन में जो स्नेह लगाई,  दुर्गम काज ताको सिद्ध हो जाई| तेरो नाम की युक्ति करता,  आवागमन के भय को हरता| जादू-टोना, मूठ भगावे,  तुरतहि सोए भाग्य जगावे| तेरो नाम का गोला दागे,  भूत...