Skip to main content

नमक वशीकरण शाबर मंत्र- Namak Vashikaran shabar mantra

 नमक वशीकरण शाबर मंत्र 
Namak Vashikaran shabar mantra
नमक वशीकरण शाबर मंत्र, Namak vashikaran shabar mantra in hindi,  mantra for vashikaran,

चेतावनी:- वशीकरण मंत्र का प्रयोग कहाँ पर करना चाहिए और कहाँ पर नहीं करना चाहिए। पहले आप इसके बारे में जानकारी हासिल कर लें। वशीकरण मंत्र का प्रयोग सदैव समाज के भले के लिए करना चाहिए। जैसे किसी बाप का पुत्र उसके कहने में नहीं है और गलत संगत में पड़ चुका है या किसी औरत का पति पराई-स्त्री के संपर्क में है तब वशीकरण मंत्र का प्रयोग करना चाहिए। याद रहे इसका दुरूपयोग आपको खाई में धकेल सकता है। इस बात को चेतावनी समझ कर इस वशीकरण मंत्र का सही उपयोग करें। यदि कोई इसका दुरूपयोग करता है और उसको कोई नुकसान होता है तो हमारी कोई जिम्मेवारी नहीं होगी।   

वशीकरण मंत्र-Vashikaran Mantra

ॐ एक नमक रमता माता, 
दूसरा नमक बिरहा से आता, 
तीसरा नमक औरी-बौरी, 
चौथा नमक रहे कर जोरी, 
यह नमक 'अमुक' खाए, 
'अमुक' को छोड़ दूसरा नहीं जाए, 
दुहाई पीर औलिया की, 
जो कहे सो सुने, 
जो माँगे सो देह, 
दुहाई गौरा-पार्वती की, 
दुहाई कामाख्या देवी की, 
दुहाई गुरु गोरक्षनाथ की|

Vashikaran mantra in english

Om ek namak ramta mata, 
Dusra namak birha se aata, 
Tisra namak auri-bori, 
Choutha namak rahe kar jouri, 
Yah namak 'Amuk' khaye, 
'Amuk' ko chodh dusra nahi jaye, 
Duhai peer auliya ki, 
Jo kahe so sune, 
Jo mange so deh, 
Duhai Gaura-Parwati ki, 
Duhai Kamakhya devi ki, 
Duhai Guru Gorakh-Nath ki.

सिद्ध करने की विधि :- इस वशीकरण मंत्र को सिद्ध करने के कुछ नियम होते हैं| यदि आप उन नियमों का पालन करके इसका प्रयोग करोगे तो आपको शत-प्रतिशत सफलता मिलेगी|
* इस मंत्र का जप आप किसी भी दिन शुरू कर सकते हो, मंत्र का जप 10 दिन तक रोज़ाना एक माला करनी है| 10 दिन तक जप का सम्य और स्थान एक ही होना चाहिए और रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करना है|
* मंत्र जप में दीप, धूप, जल का लौटा जरूर रखना है और जप किसी स्वच्छ स्थान पर किसी  आसन पर बैठ कर करना है|
* पहले दिन जब यह नमक वशीकरण साधना शुरू करें तो सबसे पहले गणेश वंदना, गुरु वंदना और कुलदेव वंदना करके शुरू करें और बाद में संकल्प लेकर जप शुरू करें| यदि आप संकल्प लेने की विधि नहीं जानते हो तो आप हमारे पेज संकल्प विधि पर क्लिक करके जानकारी प्राप्त कर सकते हो|
* साधना के दिनों में ब्रह्मचर्य का पालन करना है और मन में शुद्ध विचार रखने हैं, तभी साधना में सफलता मिलेगी|
* जब 10 दिन तक रोज़ाना एक माला जप सम्पूर्ण हो जाए तो दसवें दिन जप के बाद राई और नमक मिलाकर उसका एक माला आहुति देकर हवन करना है| इस हवन में हवन सामग्री का उपयोग नहीं करना है| यदि आप हवन की विधि नहीं जानते हो तो हमारे पेज सरल हवन विधि पर क्लिक  करके जानकारी प्राप्त कर सकते हो|

वशीकरण मंत्र प्रयोग विधि (Vashikaran Mantra prayog vidhi):- आपने 10 दिन रोज़ाना एक माला जप करके और 1 माला राई और नमक का हवन करके मंत्र सिद्ध कर लेना है| इस मंत्र में जो 2 बार अमुक शब्द आता है, 10 दिन तक जप करते सम्य अपने अमुक शब्द का ही उच्चारण करना है| जब इसका प्रयोग करना है तो हाथ में या किसी कागज पर एक चुटकी नमक रखकर इस मंत्र का 7 बार उच्चारण करके 7 बार कर नमक पर फूंक लगानी है| वशीकरण का प्रयोग करते वक़्त ऊपर दिए मंत्र में पहले 'अमुक' लिखा हुआ आता है वहां पर अपने जिसका वशीकरण करना है उसका नाम उच्चारण करना है और दूसरी बार जो 'अमुक' शब्द  आता है वहां पर जिसके द्वारा वशीकरण किया जा रहा है उसका नाम आएगा|7 बार मंत्र से नमक अभिमंत्रित करके जिसके ऊपर वशीकरण का प्रयोग किया गया है उसको किसी खाने वाली या पीने वाले चीज में मिलाकर खिला जा पिला दें| इसका प्रभाव तुरंत हो जाता है| 

कुंडली दिखाए:- आप घर बैठे कुंडली का विश्लेषण करा सकते हो। सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण में लग्न कुंडली, चंद्र कुंडली, नवमांश कुंडली, गोचर और अष्टकवर्ग, महादशा और अंतरदशा, कुंडली में बनने वाले शुभ और अशुभ योग, ग्रहों की स्थिति और बल का विचार, भावों का विचार, अशुभ ग्रहों की शांति के उपाय, शुभ ग्रहों के रत्न, नक्षत्रों पर विचार करके रिपोर्ट तैयार की जाती है। सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण की फीस मात्र 500 रुपये है।  Whatsapp- 8360319129 Barjinder Saini (Master in Astrology)

Comments

Popular posts from this blog

कुंडली में महाभाग्य योग - Mahabhagya Yog in Kundali in hindi

कुंडली में महाभाग्य योग  Mahabhagya Yog in Kundali कुंडली में महाभाग्य योग- कुंडली में महाभाग्य योग एक ऐसा योग है जिसकी कुंडली में यह योग पूर्ण रूप से बनता है। वह व्यक्ति ज़िंदगी में हर मुकाम को प्राप्त करने की क्षमता रखता है। कुंडली में महाभाग्य योग बनने वाले व्यक्ति को ज़िंदगी में चाहे कितनी भी मुश्किलें आएं मगर फिर भी ऐसे व्यक्ति की किस्मत उसका ऐसा साथ देती है कि उसके सभी कार्य सम्पूर्ण जरूर होते हैं। ऐसा योग बनने वाले व्यक्ति कि बारे में दुनिया यदि सोच रखती है कि इस व्यक्ति की किस्मत बहुत अच्छी है। महाभाग्य योग पुरुष और स्त्री को दोनों की कुंडली में अलग-अलग नियमों से बनता है। हम आपको आगे महाभाग्य योग बनाने वाले सभी नियमों की जानकारी देते हैं और साथ कुंडली में यह योग भंग कैसे होता है उसकी जानकारी भी देते हैं।  पुरुष की कुंडली में महाभाग्य योग  पहला नियम - पहला नियम यह है कि कुंडली में महाभाग्य योग होने के लिए पुरुष की कुंडली में लग्न भाव, सूर्य और चंद्र ग्रह विषम राशिओं में होने चाहिए अर्थात इनकी राशि 1, 3, 5, 7, 9  और 11  होनी चाहिए।  जैसे आप ऊपर चित्र ...

कुंडली में शुभ कर्तरी योग - Shubh Kartari yoga in kundali in hindi

कुंडली में  शुभ कर्तरी योग  Shubh Kartari yoha in kundali in hindi शुभ कर्तरी योग क्या है (What is Shubh Kartari Yoga)- जब जन्म कुंडली के किसी भाव  से  एक भाव आगे और एक भाव पीछे सौम्य ग्रह बैठे हो तब उस भाव से शुभ कर्तरी योग बनता है।  यदि आपको सौम्य, क्रूर और पापी ग्रहों की जानकारी नहीं है तो आप हमारे पेज सौम्य और क्रूर ग्रह पर क्लिक करके प्राप्त कर सकते हो।  जिस भाव से शुभ कर्तरी योग बन रहा होता है यदि उस भाव में कोई ग्रह बैठा हो वह भी शुभ कर्तरी के प्रभाव में आ जाता है। जन्म कुंडली के जिस भाव में शुभ कर्तरी योग बनता है उस भाव के फलों की प्राप्ति बहुत कम संघर्ष करने पर ही हो जाती है और उस भाव से सम्बंधित फल बहुत सुगमता और शीघ्रता से प्राप्त होते हैं। ऐसे ही कुंडली के जिस भाव से भी शुभ कर्तरी योग बनता है उस भाव के फल बाहर शीघ्रता और सुगमता से प्राप्त होते हैं। हम आपको नीचे उदाहरण देकर समझते हैं कि जन्म कुंडली में कैसे शुभ कर्तरी योग बनता है और यह योग कब भंग हो जाता है। शुभ कर्तरी योग कैसे बनता है - How is Shubh Kartari yoga formed? जैसे आप ऊपर दिए हु...

माँ काली चालीसा - Maa Kali Chalisa in hindi

माँ काली चालीसा  Maa Kali Chalisa in hindi दोहा  जय जय सीताराम के मध्यवासिनी अम्ब, देहु दर्श जगदम्ब अब, करो न मातु विलम्ब, जय तारा जय कलिका जय जय विद्या वृन्द,  काली चालीसा रचित एक सिद्धि कवि हिन्द,  प्रातः उठ जो पढ़े, दुपहरिया या शाम,  दुःख दरिद्र दूर हो, सिद्ध होए सब काम।  चालीसा  जय काली कंकाल मालिनी, जय मंगला महा कपालिनी।  रक्तबीज बधकारिणी माता, सदा भक्त-जन की सुखदाता।  शिरो मालिका भूषित अंगे, जय काली जय मध्य मतंगे।  हर हृदा रविन्द सविलासिनी, जय जगदम्बा सकल दुःख नाशिनी।  ह्रीं काली श्रीं महा कराली, क्रीं कल्याणी दक्षिण काली।  जय कलावती जय विद्यावती, जय तारा सुंदरी महामति।  देहु सबुद्धि हरहु सब संकट, होहु भक्त के आगे प्रगट।  जय ओमकारे जय हुंकारे, महाशक्ति जय के अपरम्पारे।  कमला कलयुग दर्प विनाशिनी , सदा भक्तजन के भयनाशिनी।  अब जगदम्ब ना देर लगावहु, दुःख-दरिद्रता मोर हटावहु। जयति कराल कलिका माता, कालानल समान धूतिगाता।  जयशंकरी शुरेशि सनातनि, कोटि सिद्धि कवि मातु पुरा तनि।  कपर्दिनी कलि कल्प बिमोचि...

कुंडली में केमद्रुम योग का प्रभाव - kemdrum yog in kundali in hindi

कुंडली में केमद्रुम योग का प्रभाव  Kemdrum yog effect and remedies in hindi कुंडली में केमद्रुम योग का प्रभाव - कुंडली में कई तरह के अच्छे और बुरे योग बनते हैं। उनमें से एक केमद्रुम योग है जो कि एक बहुत बुरा योग है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में यह योग बनता है तो उस व्यक्ति का मन सदैव संसार से उखड़ा रहता है अर्थात उसका मन किसी भी कार्य में नहीं लगता है। उसको ज़िंदगी में अकेला महसूस होता है और ऐसे व्यक्तिओं को किसी भी क्षेत्र में महारथ हासिल करने में बहुत मुश्किल होती है। केमद्रुम योग बनने से व्यक्ति को ज़िंदगी में आगे बढ़ने में बहुत मुश्किल होती है। जिन कुंडलियों में यह योग बनता दिखाई देता है, यदि उन कुंडलिओं में सभी नियम लगाकर देखे जाए तो ज्यादातर कुंडलिओं में यह केमद्रुम योग भंग हो जाता है। हम आपको आगे सभी नियम बताकर समझाते हैं कि कुंडली में केमद्रुम योग बनता कैसे हैं और यह योग भंग कैसे होता हैं।  केमद्रुम योग क्या है - केमद्रुम योग को हमेशा चंद्र कुंडली से देखना चाहिए। यदि चंद्र कुंडली में लग्न भाव में चंद्र ग्रह अकेला बैठा हो और उससे दूसरे भाव अर्थात अगले भाव म...

कुंडली में गजकेसरी योग का निर्माण- Gajakesari Yoga in kundali in hindi

कुंडली में गजकेसरी योग का निर्माण Gajakesari Yoga in kundali in hindi गजकेसरी योग क्या है (What is Gajkesari Yog)- कुंडली में गुरु और चंद्र ग्रह से गजकेसरी योग बनता है। जब किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु और चंद्र ग्रह किसी भाव में एक साथ बैठे हो या जन्म कुंडली में गुरु ग्रह से चंद्र चौथे, सातवें या दसवें भाव में हो तब गजकेसरी योग का निर्माण होता है। मगर यह योग बनने के लिए काफी नियम लागू होते हैं। यदि जन्म कुंडली में यह नियम और शर्तें पूरी होती हैं तभी प्रबल योग समझा जाता है अन्यथा सिर्फ कुंडली में गुरु और चंद्र ग्रह की युति या गुरु से चौथे, सातवें या दसवें घर में चंद्र के बैठने से यह योग नहीं बनता है। हम आपको आगे गजकेसरी योग बनाने वाले नियम की पूर्ण जानकारी देते हैं।  गजकेसरी योग का अर्थ होता है जैसे हाथिओं के झुंड में अकेला शेर चलता है। यह योग चंद्र पर गुरु के प्रभाव से बनता है। जैसे आपको पता है चंद्र हमारे मन का कारक है और जब चंद्र पर गुरु का ऐसा प्रभाव या युति बनती है तो गुरु के कारकत्व व्यक्ति के मन को प्रभावित करते हैं। कुंडली में ऐसा योग बनने वाले व्यक्ति ...