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नीलम रत्न धारण करने के लाभ - Blue Sapphire (Neelam) Stone Benefits in hindi

नीलम रत्न धारण करने के लाभ 
Blue Sapphire Stone Benefits in hindi

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नीलम रत्न धारण करने के लाभ और पहचान - नीलम रत्न शनि देव का रत्न होता है। इसको शनि ग्रह के बल को बढ़ाने के लिए धारण किया जाता है। शनि ग्रह न्याय, हमारे कर्म, संघर्ष के कारक ग्रह होते हैं। यदि कुंडली में शनि देव की स्थिति अच्छी हो और हम नीलम रत्न धारण करें तो शनि से सबंधित कारकत्वों में बढ़ोतरी होती है। इसके अतिरिक्त शनि ग्रह व्यक्ति की जन्म कुंडली में जिस भाव में विराजित होते हैं, जिन भावों में शनि की राशियां मकर और कुम्भ होती हैं या शनि की जिन भावों पर 3 दृष्टियां (3, 7, 10वीं दृष्टि) होती है , शनि का रत्न नीलम धारण करने से उस भावों के फलों में भी वृद्धि होती है। मगर याद रहे शनि ग्रह का रत्न नीलम धारण करने के भी कुछ नियम होते हैं और यदि शनि की कुंडली में बुरी स्थिति होने पर रत्न धारण कर लिया जाये तो आपको लाभ के स्थान पर नुकसान हो सकता है। हम आपको शनि के रत्न नीलम धारण करने के नियम बताते हैं। 

शनि रत्न नीलम धारण करने के नियम - यदि जन्म कुंडली में शनि ग्रह योग कारक होकर किसी अच्छे भाव अर्थात त्रिकोण भाव (1, 5, 9), केंद्र भाव (4, 7, 10) या किसी अन्य अच्छे भाव में विराजित हों तभी शनि रत्न नीलम धारण करना चाहिए और यदि शनि ग्रह जन्म कुंडली में योग कारक होकर त्रिक भाव (6, 8, 12) या त्रिषडाये भाव (3, 6, 11) में बैठे हों तब किसी अच्छे ज्योतिष की परामर्श से ही रत्न धारण करें। यदि कुंडली में शनि ग्रह मारक होकर बैठे हों तब भूल कर भी शनि रत्न नीलम धारण नहीं करना चाहिए। यदि आपको कुंडली में योग कारक और मारक ग्रहों की पहचान करनी नहीं आती है तो आप हमरे पेज योग कारक और मारक ग्रह पर क्लिक करके प्राप्त कर सकते हो। 

रत्न क्यों धारण किया जाता है  :- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति अपने पिछले जन्म के संचित कर्मों को साथ लेकर जन्म लेता है और उसके पिछले जन्म के संचित कर्मों के मुताबिक उसकी जन्म कुंडली का निर्माण होता है और उसके कर्मों के हिसाब से उसकी कुंडली में ग्रह उसको अच्छा और बुरा फल देने के लिए अलग अलग भावों में बैठते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार 9 ग्रहों की रश्मियां प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित करके उसको अच्छा या बुरा परिणाम देती हैं। ज्योतिष  शास्त्र का गणित हमें यह बताता है कि हमारी जन्म कुंडली में कौन-कौन से ग्रह योग कारक अर्थात अच्छा फल देने वाले और कौन-कौन से ग्रह मारक अर्थात बुरा फल देने वाले बैठे हैं। जब हमें यह पता चल जाता है कि हमारे लिए कौन-कौन से ग्रह अच्छे और बुरे हैं तो सुभाविक बात है कि योग कारक ग्रह अर्थात अच्छा फल देने वाले ग्रहों की अधिक प्रभाव में रश्मियां हमारे ऊपर पड़ेंगी तो हमें अधिक अच्छे परिणाम मिलेंगे और यदि कम पड़ेंगी तो कम अच्छे परिणाम मिलेंगे। ऐसे ही यदि कुंडली में किसी योग कारक ग्रह अर्थात अच्छा फल देने वाले ग्रह का बल कम हो, वह सूर्य के साथ अस्त हो या षटबल में कमजोर हो तब उस ग्रह से सबंधित रत्न धारण करके उसके बल को बढ़ाया जाता है। किसी ग्रह का रत्न एक चुम्बक ( Magnet) की तरह कार्य करता है। किसी ग्रह से सम्बंधित रत्न उसकी रश्मियों को ग्रहण करके व्यक्ति में संचार करने का कार्य करता है। किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई ग्रह जिस भाव में बैठा हो, जिन भावों पर उसकी दृष्टि हो, जिन भावों में उसकी राशियां हों या जो ग्रह के कारकत्व हो, ग्रह उसका फल ही देते हैं। ऐसे ही यदि कुंडली में मारक ग्रह अर्थात बुरा फल देने वाले ग्रहों से सम्बंधित रत्न धारण कर लिया जाये तो उस ग्रह का बल बढ़ने से बुरे परिणाम अधिक मिलने शुरू हो जाते हैं। इसलिए कभी भी मारक ग्रह का रत्न धारण मत करें। 

नीलम रत्न की पहचान - नीलम रत्न 3-4 प्रकार का मुख्या रूप से मार्किट में आता है। भारत में पाडर का नीलम सबसे कीमती होता है। पाडर नीलम की कीमत की बात की जाए तो यह रत्न 5000 से 50000 रुपये प्रति रत्ती की कीमत से मिलता है। इसके बाद श्रीलंका का नीलम अच्छा माना जाता है। इसको सलोनी नीलम भी कहा जाता है। यह नीलम 1200 से 10000 रुपये प्रति रत्ती की कीमत पर मिलता है। इसके बाद बैंकाक का नीलम सबसे सस्ता होता है। यह नीलम 250 से लेकर 700 रुपये प्रति रत्ती की कीमत पर मिलता है। नीलम रत्न की क्वालिटी उसकी पारदर्शिता से निर्धारित होती है। रत्न जितना साफ़ होगा उसकी कीमत उतनी ज्यादा होगी और जिस रत्न में जितने रेशे ज्यादा होंगे उसकी कीमत उतनी कम होगी। ज्यादा पारदर्शिता वाला रत्न लाभ भी ज्यादा देता है, क्यूंकि उसमें से प्रकाश ज्यादा गुजरता है। यदि आप असली और प्रमाणित नीलम रत्न खरीदना चाहते हो तो आप नीलम रत्न पर क्लिक करके प्राप्त कर सकते हो। 

नीलम रत्न कब और कैसे धारण करें (When and how to wear Blue Sapphire Stone) - नीलम रत्न को शनिवार को धारण करना चाहिए। शनि रत्न को सोने या चांदी की अंगूठी में धारण किया जाता है मगर सोने या चांदी में पंच-धातु (ताम्बा, सोना, चांदी, जिस्त और कांसा) धातु का कुछ मात्रा में मिश्रण भी होना चाहिए। नीलम रत्न धारण करने से पहले इसको गंगाजल से शुद्ध कर लें और पूजा स्थान में रखकर शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करके धारण करें। 

कुंडली दिखाए:- आप घर बैठे कुंडली का विश्लेषण करा सकते हो। सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण में लग्न कुंडली, चंद्र कुंडली, नवमांश कुंडली, गोचर और अष्टकवर्ग, महादशा और अंतरदशा, कुंडली में बनने वाले शुभ और अशुभ योग, ग्रहों की स्थिति और बल का विचार, भावों का विचार, अशुभ ग्रहों की शांति के उपाय, शुभ ग्रहों के रत्न, नक्षत्रों पर विचार करके रिपोर्ट तैयार की जाती है। सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण की फीस मात्र 500 रुपये है।  Whatsapp-8360319129  Barjinder Saini (Master in Astrology)


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Comments

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  2. मेरी कुंडली मे 5 वे भाव मे सुर्य बुध अऔर शनि हैं क्या मे निलम पहन शकता हू सनि वक्रि भी है

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