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शनि बीज मंत्र विधि और लाभ - Beej Mantra for Shani dev in hindi

शनि ग्रह बीज मंत्र

 Beej Mantra for Shani dev in hindi 

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शनि बीज मंत्र विधि और लाभ -सबसे धीमी चाल चलने वाले शनि देव यदि किसी व्यक्ति पर प्रसन्न हो जाएं तो उस व्यक्ति को रंक से राजा बना देते हैं और यदि शनि देव अपनी क्रूर दृष्टि किसी व्यक्ति पर डाल दें तो उस व्यक्ति को राजा से रंक भी बना देते हैं|

शनि ग्रह को लेकर हमारे लोगों में काफी भ्रांतियां फैलाई जाती हैं कि यदि किसी व्यक्ति के ऊपर शनि की महादशा, अंतर दशा, ढैया (2.5 वर्ष), साढ़सति (7.5 वर्ष) की दशा चलती है तो शनि देव उस व्यक्ति को कष्ट देना शुरू कर देते हैं या कई लोग इंटरनेट या टेलीविज़न में अपनी राशि के आधार पर शनि का ढैया या साढ़ेसाती की दशा का फल देखना शुरू कर देते हैं| मगर आपको बता दें कि कुंडली में शनि की स्थिति देखने के लिए काफी कुछ देखना पड़ता है और फिर हम किसी परिणाम तक पहुँच सकते हैं कि शनि आपको अच्छा फल देंगे या बुरा फल देंगे| कुंडली में शनि की अच्छी या बुरी स्थिति देखने के लिए देखा जाता है कि शनि योग कारक है या मारक, शनि कुंडली के कौन से भाव में स्थित है, शनि सूर्य के साथ अस्त है कि नहीं, शनि शत्रु राशि में स्थित तो नहीं| यह सब कुछ देखने के बाद हम किसी परिणाम तक पहुँच सकते हैं कि हमारी कुंडली में शनि शुभ फल देने के लिए बैठे हैं या अशुभ| यदि शनि शुभ फल देने के लिए बैठे होंगे तो आपको शनि के ढैया, साढ़ेसाती, महादशा और अंतरदशा में शुभ फल मिलेगा और यदि शनि की स्थिति अशुभ होगी तो आपको उसकी सभी दशाओं में अशुभ फल ही मिलेंगे| 

मगर आपको यहाँ पर शनि देव की कुछ विषेशताएं बता देते हैं कि शनि देव को न्याय का ग्रह माना जाता है| यदि शनि की किसी भी दशा में आपको संघर्ष और कष्ट प्राप्त होता है तो वह शनि देव आपको आपके कर्मो के मुताबिक ही फल दे रहे होंगे| दूसरी बात यह कि शनि देव सबसे धीमी चाल चलने वाले ग्रह होते हैं, इसलिए इनकी दशा में व्यक्ति को अच्छे या बुरे परिणाम अचानक नहीं मिलते बल्कि धीरे धीरे मिलते हैं| तीसरी बात यह कि शनि की दशा अच्छी हो या बुरी,  मगर इनकी दशा में व्यक्ति का संघर्ष बहुत बढ़ जाता है| व्यक्ति को बहुत कठिन परिश्रम करने के बाद ही फलों की प्राप्ति होती है| सबसे उत्तम शनि देव की विशेषता यह है कि शनि देव व्यक्ति की जिंदगी में संघर्ष और कष्ट लेकर व्यक्ति को कंचन बनाने के लिए आते हैं| वह अपनी दशा में व्यक्ति को संसार की पहचान करा देते हैं कि तुम्हारे लिए क्या सही है और क्या गलत है, तुम्हारा कौन अपना है और कौन पराया है? यह शनि देव की महिमा है|

मगर यदि आपके इस जन्म और पिछले जन्म के संचित कर्मों का भोग प्रदान करने के लिए शनि आपकी कुंडली में मारक होकर अर्थात बुरी स्थिति में बैठ जाएं तो उनकी प्रत्येक दशा में व्यक्ति को बहुत कष्ट प्राप्त होने शुरू हो जाते हैं| व्यक्ति के सभी कार्य बिगड़ने शुरू हो जाते हैं, मानसिक परेशानी बढ़ जाती है, अपने भी पराए होने लगते हैं और कई तरह से शारीरिक कष्ट मिलने शुरू हो जाते हैं| यदि मारक शनि ग्रह की शांति ना की जाए तब यह कष्ट इनकी दशा में बहुत दर्दनायक हो जाते हैं| वैसे तो आप शनि से संबंधित दान करके भी शनि देव की शांति कर सकते हो, मगर शनि देव को शांत करने के लिए दान के साथ साथ इनके बीज मंत्र का जाप सबसे उत्तम उपाए है| यदि आप शनि देव के बीज मंत्र का जाप श्रद्धा और विश्वास के साथ करना शुरू कर देते हो तो शनि देव का मारकत्व कारकत्व में बदल जाता है और आपकी सभी कार्य सिद्ध होने शुरू हो जाते हैं|

शनि देव बीज मंत्र-Beej Mantra of Shani dev

ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः 
ॐ शं शनैश्चराय नमः

Shani mantra in English

Om Pram Prim Prom sah Shaneshchraye Namha. 
Om Sham Shaneschraye namha. 

शनि बीज मंत्र की विधि (Shani Beej Mantra Vidhi):- ऊपर दिए गए दोनों बीज मंत्रों से आप किसी एक मंत्र का जाप कर सकते हो| शनि बीज मंत्र जाप की विधि इस प्रकार है|
* शनि बीज मंत्र का जाप अपने किसी शनिवार के दिन से शुरू करना है।
* शनि बीज मंत्र का जाप किसी आसन पर बैठ कर करना है और जाप करने के लिए रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करना है।
* पहले दिन जाप शुरू करने से पहले गणेश पूजा, गुरु पूजा और कुलदेव की पूजा कर उनसे आशीर्वाद लेकर शनिदेव का जाप शुरू करना है।
* शनिदेव मंत्र का जाप करने से पहले संकल्प जरूर लें, यदि आपको संकल्प लेने की विधि नहीं मालुम है तो आप हमारे पेज संकल्प की विधि पर क्लिक करके जानकारी प्राप्त कर सकते हो।
* शनिवार जब मंत्र जाप शुरू करना हो तब उससे पहले अपने नज़दीक किसी शनिदेव के मंदिर में सरसों का तेल, उड़द, लाल शक्कर या गुड़, काले तिल आदि काले या नीले वस्त्र में बांध कर वह पर चढ़ा आएं। यदि संभव हो तो यह क्रिया ५ शनिवार करें।   
* शनि बीज मंत्र जाप में यदि शनि यन्त्र को पूजा स्थान में स्थापित करके साधना की जाये तो विशेष लाभ मिलता है। यन्त्र खरीदने के लिए सिद्ध शनि यन्त्र पर क्लिक करें। मंत्र साधना सम्पूर्ण होने के बाद शनि यन्त्र को बहते पानी में विसर्जन कर दें। 
* रोज़ाना शनि बीज मंत्र का कम से कम एक माला जाप जरूर करना है और कोशिश करें कि जाप करने का समय और स्थान रोज़ाना एक हो।
* आखिर में सबसे महत्वपूर्ण बात कि मंत्र का जाप जितनी श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जायेगा, उतना लाभ अधिक होगा।

शनि बीज मंत्र के लाभ (Shani Beej Mantra Benefits) : शनि देव को न्याय प्रिय गृह कहा जाता है। यदि इनकी कृपा किसी पर हो जाए तो व्यक्ति को रंक से राजा बनाने में देर नहीं लगती। किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि कितने भी मारक होकर क्यों ना बैठे हों यदि व्यक्ति सच्ची श्रद्धा से उनके बीज मंत्र की साधना करनी शुरू कर देता है तो उनके मारकत्व को कारकत्व में बदलने में देर नहीं लगती है।
यह जरुरी नहीं है कि जिनकी कुंडली में शनि मारक होकर बैठा हो, वही लोग शनि के बीज मंत्र का जाप कर सकते हैं। शनि देव के मंत्र की साधना कोई भी व्यक्ति कर सकता है और उसको शनि बीज मंत्र से लाभ ही होगा। शनि देव के बीज मंत्र की साधना से व्यक्ति के सभी कार्य सिद्ध होने शुरू हो जाते हैं। शनि देव को अध्यात्म और गूढ़-ज्ञान का गृह भी माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति इनके मंत्र का जाप करना शुरू करता है तो उस व्यक्ति को अध्यात्म और अंदरूनी ज्ञान खुद प्राप्त होना शुरू हो जाता है। वह व्यक्ति ज़िंदगी के कई गूढ़ रहस्य जान जाता है। यदि किसी व्यक्ति को कोई शारीरिक कष्ट है और उसका उपचार चिकित्सा से नहीं हो पा रहा है तो आप शनि मंत्र का जाप करके उस कष्ट से मुक्त हो सकते हो। 

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नोट- नवग्रहों के बीज मंत्र की विधि|


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