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नवमांश कुंडली का महत्व -Navmansh Kundali in hindi

नवमांश कुंडली का महत्व 
Navmansh Kundali in Astrology

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नवमांश कुंडली क्या होती है (What is Navmansh Kundali):-  ज्योतिष शास्त्र में जैसे लग्न कुंडली, चंद्र कुंडली, चलित कुंडली और होरा कुंडली, दशमांश कुंडली, सप्तमांश कुंडली आदि वर्ग कुंडलियां होती है, वैसे ही नवमांश कुंडली एक वर्ग कुंडली होती है। आपको बता दें कि कुंडली विश्लेषण में नवमांश का बहुत महत्व होता है, नवमांश कुंडली का विश्लेषण किए बिना आप कभी भी सही फलित नहीं कर सकते हो। 

वैसे तो ज्यादातर ज्योतिषिओं का मत है कि नवमांश कुंडली का प्रयोग सिर्फ व्यक्ति की शादी या पति-पत्नी के बारे में विश्लेषण करने में करना चाहिए, मगर यदि हम सारावली या फल दीपिका जैसी किताबों को पढ़ते हैं तो हमें मालुम होता है कि नवमांश कुंडली सिर्फ शादी या पति-पत्नी के बारे में विश्लेषण करने के लिए नहीं बल्कि प्रत्येक ग्रह और भाव के बल, स्थिति के बारे में जानने के लिए बहुत आवश्यक होती है। हम ऐसा भी कह सकते हैं कि यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली व्यक्ति का शरीर है तो नवमांश कुंडली उसके शरीर का अंदरूनी विश्लेषण है। जैसे कई बार कोई व्यक्ति बाहर से देखने में तो बहुत तंदरुस्त लगता है मगर जब उसकी डॉक्टरी अंदरूनी जाँच कराई जाए तो पता चलता है कि  इसको दिल की बीमारी या कोई अन्य बीमारी है। ऐसे ही जन्म कुंडली व्यक्ति का बाहर से दिखाई देने वाला ढांचा है और नवमांश कुंडली उसका अंदरूनी विश्लेषण है। 

नवमांश कुंडली का विश्लेषण करने में काफी सिद्धांत लागू होते हैं, उन सारे बिंदुओं पर हम एक-एक करके बात करेंगे।

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नवमांश कुंडली कैसे देखें (Navmansh Kundali kaise dekhe):- जैसे आप ऊपर चित्र नंबर.1 जन्म कुंडली का देख रहे हो और उसी व्यक्ति की चित्र नंबर.2 नवमांश कुंडली है| इन दोनों कुंडलिओं की उदाहरण लेकर हम एक एक बिंदु पर चर्चा करते हैं|

1. जन्म कुंडली के उच्च ग्रह का नवमांश कुंडली में नीच होना:- जब आप किसी व्यक्ति की कुंडली का विश्लेषण कर रहे होते हो तो मान लो कि जन्म कुंडली का कोई ग्रह किसी राशि में उच्च का होकर बैठा है और नवमांश कुंडली में वहीं ग्रह जाकर नीच राशि का हो जाए तो उसके बलाबल में कमी आती है, जैसे आप चित्र नंबर.1 में देख रहे हो कि जन्म कुंडली में चंद्र ग्रह उच्च राशि का होकर बैठा है और चित्र नंबर. 2 में नवमांश कुंडली में चंद्र वृश्चिक राशि में नीच होकर बैठा है| अब हम यहाँ पर कह सकते हैं कि चंद्र जन्म कुंडली में जितना बलि दिखाई दे रहा था उसमें उतना बल नहीं है| इसके उलट यदि कोई ग्रह लग्न राशि में नीच का होकर बैठा है और नवमांश कुंडली में उच्च का होकर बैठ जाए तो हम कह सकते हैं कि वह ग्रह अपना फल देने में समक्ष है| ऐसे ही यदि कोई भी ग्रह जन्म कुंडली में उच्च राशि, मित्र राशि या स्वं राशि का होकर बैठा है तो उसका पूर्ण विश्लेषण करने के लिए उसको नवमांश में देख लेना चाहिए|

2. अस्त ग्रह का नवमांश में विचार ( Ast grah in Navmansh kundali):- हम किसी भी ग्रह का अस्त होने का विचार सिर्फ जन्म कुंडली देखकर कर देते हैं| यदि कोई ग्रह सूर्य के साथ युति बनाकर बैठा है तो हम कह देते हैं कि यह ग्रह अस्त हो चुका है अब यह बिलकुल फल देने में समक्ष नहीं रहा है| हम आपको बता दें कि यदि कोई ग्रह जन्म कुंडली में सूर्य के साथ युति बनाकर बैठा है मगर नवमांश कुंडली में वह अस्त ग्रह सूर्य से 3 घर आगे या 3 घर पीछे चला जाए तो वह ग्रह अपना फल देने में समक्ष होता है| जैसे आप चित्र नंबर. 1 में देख रहे हो कि यहाँ बुध सूर्य के साथ अस्त है और चित्र नंबर. 2 में बुध सूर्य से 3 घर आगे चला गया है, यहाँ पर हम कह सकते हैं कि बुध में फल देने की क्षमता अभी भी है| यहाँ पर यदि कोई ग्रह योग कारक होकर अच्छे घर का स्वामी है तो हम उसका रत्न धारण करके उसके बल को और बढ़ा सकते हैं| 

3. नवमांश कुंडली में ग्रह का वर्ग उत्तम होना (Navmansh Kundali mein grah ka varg uttam):-  सबसे पहले हम यह जान लें कि कोई ग्रह वर्ग उत्तम कैसे होता है| यदि कोई ग्रह जन्म कुंडली में जिस राशि में बैठा है और नवमांश में भी उसी राशि में चला जाए तो वह ग्रह वर्ग उत्तम हो जाता है| जैसे आप चित्र नंबर. 1 में देख रहे हो कि सूर्य लग्न भाव में अपनी स्वं राशि सिंह में बैठा हुआ है और चित्र नंबर. 2 में नवमांश कुंडली में भी सूर्य चतुर्थ भाव में अपनी स्वं राशि सिंह में चला गया है| इस तरह से सूर्य वर्ग उत्तम ग्रह हो गया है| वर्ग उत्तम ग्रह बहुत अधिक और अच्छा उत्तम फल देते हैं| यदि कोई मारक या बुरे भाव का स्वामी ग्रह वर्ग उत्तम हो जाए तो वह आपने बुरे परिणाम कम देता है| यहाँ पर आपको इसका एक और सिद्धांत बता दें कि यदि कोई ग्रह क्रूर नवमांश में चला जाए तो वह ग्रह संघर्षो के बाद अपना फल देता है और यदि कोई ग्रह सौम्य नवमांश में चला जाए तो आपको बहुत कम मेहनत से ही फलों की प्राप्ति होती है| उदाहरण के तौर पर जैसे चित्र नंबर 1 में शुक्र अपनी स्वं राशि में बैठा हुआ है और चित्र नंबर 2 में नवमांश कुंडली में शुक्र मेष राशि अर्थात क्रूर नवमांश में चला गया है| यहाँ पर हम कह सकते हैं कि शुक्र की महादशा या अंतरदशा में संघर्षो के बाद फलों की प्राप्ति होगी| यदि यहाँ पर शुक्र नवमांश कुंडली में चंद्र,  बुध या अपनी स्वं राशि में चला जाता तो हम कह सकते थे कि शुक्र की महादशा या अंतरदशा में बहुत कम मेहनत से आपको फलों की प्राप्ति होगी| यदि आप क्रूर ग्रह और सौम्य ग्रहों की पहचान नहीं करना जानते हो तो हमारे पेज क्रूर ग्रह और सौम्या ग्रह पर क्लिक करके जानकारी प्राप्त कर सकते हो|

4. चंद्र राशि पर विचार:- ज्योतिष शास्त्र में चंद्र कुंडली का बहुत विशेष महत्व होता है| चंद्र हमारे मन का कारक ग्रह होता है  और हमारे स्वभाव और मन की अवस्था का चंद्र राशि और चंद्र कुंडली से ही पता चलता है| इसी लिए चंद्र राशि और चंद्र कुंडली को इतना महत्व दिया जाता है| अब हम बात करते हैं चंद्र राशि की नवमांश कुंडली में क्या भूमिका होती है| हम किसी की कुंडली का विश्लेषण करते सम्य व्यक्ति की चंद्र राशि के स्वभाव और गुणों के आधार पर व्यक्ति के गुण और स्वभाव बताना शुरू कर देते हैं| उदाहरण के तौर पर मान लो किसी की चंद्र राशि वृष्भ है और वृषभ राशि का स्वामी शुक्र होता है तो हम यहाँ पर शुक्र के गुणों और स्वभाव देखकर बताने लगते हैं कि व्यक्ति शांत स्वभाव का होगा, व्यक्ति सुंदर वस्त्र, इत्र लगाने आदि का शौकीन होगा,  मगर यहाँ पर यदि उसी व्यक्ति की नवमांश कुंडलीें में चंद्र किसी क्रूर राशि में चला जाए तो यहाँ पर हमें मिश्रित फल बताने होंगे| उदाहरण के लिए जैसे चित्र नंबर. 1 में चंद्र वृषभ राशि में है तो यहाँ पर इस व्यक्ति की चंद्र राशि के स्वामी शुक्र के गुणों को देखकर हम कहने लगते हैं कि व्यक्ति शांत स्वभाव का होगा, मगर यदि आप चित्र नंबर. 2 में इसी व्यक्ति की नवमांश कुंडली में चंद्र की स्थिति देखोगे कि वह वृश्चिक राशि अर्थात क्रूर राशि में चला गया है और इस राशि का स्वामी मंगल होता है| यहाँ पर इन दोनों राशिओं के स्वभाव बिलकुल विपरीत हैं| यहाँ वृषभ राशि का स्वामी शुक्र ग्रह सौम्य स्वभाव वाला है और वहीँ वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल का स्वभाव उग्रता वाला है| यहाँ पर हमें जन्म कुंडली और नवमांश कुंडली दोनों में चंद्र की स्थिति देखकर मिश्रित फल बताने चाहिए|

5. लग्न को नवमांश में देखना (Lagna in Navmansh):- किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में लग्नेश की स्थिति बहुत अच्छी है और वहीं लग्नेश नवमांश में नीच राशि या नवमांश कुंडली की उस राशि में बैठा हो जो राशि जन्म कुंडली में त्रिक भावों की राशि है, तो वहां पर लग्नेश पीड़ित अवस्था में आ जाता है| यहाँ पर व्यक्ति को जिंदगी में अधिक संघर्षों के बाद फलों की प्राप्ति होती है| 

6. मांगलिक दोष या योग का नवमांश कुंडली में विचार (Manglik dosh consider in Navmansh Kundali):- यदि किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में मांगलिक योग बन रहा है और उसकी नवमांश कुंडली में भी मांगलिक योग बन रहा हो तो वह मांगलिक योग बहुत प्रबल हो जाता है| वहां पर किसी अच्छे ज्योतिष की परामर्श से कुंडली मिलान करके ही शादी का विचार करना चाहिए| आपको बता दें जन्म कुंडली में प्रथम भाव (लग्न भाव),  चतुर्थ भाव, सप्तम भाव, अष्टम भाव और द्वादश भाव में मंगल होने पर मांगलिक योग बनता है, मगर कई स्थिति में यह योग भंग भी हो जाता है| मांगलिक योग की पूर्ण जानकारी के लिए आप हमारे पेज कुंडली में मांगलिक योग पर क्लिक करके जानकारी प्राप्त कर सकते हो| 

7. विवाह और पति-पत्नी का नवमांश में विचार (Marriage and spouse consider in Navmansh):- आप सब जानते हो कि जन्म कुंडली के सप्तम भाव से शादी और पति-पत्नी का विचार किया जाता है| जन्म कुंडली में सप्तमेश नीच राशि का हो, शत्रु राशि में बुरे भाव में बैठा हो, त्रिक भाव में शत्रुक्षेत्री होकर बैठा हो या सप्तम भाव में मारक ग्रह उच्च के होकर बैठे हो तो हम मान लेते हैं कि व्यक्ति की कुंडली में यह भाव बहुत पीड़ित है और व्यक्ति की शादी में विघ्न आएंगे या शादीशुदा जिंदगी में मुश्किलें आएँगी| इसके अतिरिक्त यदि जन्म कुंडली में लड़कों की शादी और पत्नी के कारक ग्रह शुक्र और लड़की की शादी और पति के कारक ग्रह बृहस्पति पर विचार किया जाता है| यदि यह ग्रह कुंडली में पीड़ित हो जा नीच राशि, त्रिक भाव, शत्रु क्षेत्री या मार्क ग्रहों के साथ युति बनाकर बैठे हो तो हम मान लेते हैं कि इनकी शादीशुदा जिंदगी में अड़चने आ सकती हैं| मगर यहाँ पर आपको बता दें कि यदि जन्म कुंडली में सप्तमेश, शुक्र या बृहस्पति की स्थिति अच्छी ना हो और नवमांश कुंडली में सप्तमेश ग्रह जाकर उच्च राशि का हो जाए या शुक्र की स्थिति नवमांश में जाकर अच्छी हो जाए, ग्रह वर्ग उत्तम हो जाए तो सप्तम भाव के अच्छे फलों की प्राप्ति होती है|

8. नवमांश में युति का विचार (Navmansh kundali mein yuti ka vichar) जन्म कुंडली में कोई दो, तीन या इससे अधिक ग्रह युति बनाकर बैठे हैं और वहीं ग्रहों की यदि नवमांश कुंडली में भी युति बन रही हो तो उनकी युति प्रभल मानी जाती है|

कुंडली दिखाए:- आप घर बैठे कुंडली का विश्लेषण करा सकते हो। सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण में लग्न कुंडली, चंद्र कुंडली, नवमांश कुंडली, गोचर और अष्टकवर्ग, महादशा और अंतरदशा, कुंडली में बनने वाले शुभ और अशुभ योग, ग्रहों की स्थिति और बल का विचार, भावों का विचार, अशुभ ग्रहों की शांति के उपाय, शुभ ग्रहों के रत्न, नक्षत्रों पर विचार करके रिपोर्ट तैयार की जाती है। सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण की फीस मात्र 500 रुपये है।  Whatsapp-8360319129  Barjinder Saini (Master in Astrology)


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