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बगलामुखी मंत्र साधना विधि - Baglamukhi Mata Mantra sadhna in Hindi

बगलामुखी मंत्र साधना विधि 
Baglamukhi Mata Mantra sadhna in Hindi 

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माँ बगलामुखी की उत्पति:- माँ बगलामुखी की उत्पति को लेकर 3 कथाएं प्रचलित हैं। पहली कथा में कहा जाता है कि ऋषि विश्वामित्र जी ने दूसरे स्वर्ग की इच्छा से गायत्री देवी का कठोर तप करना शुरू किया था, जिससे प्रसन्न होकर गायत्री देवी ने ऋषि विश्वामित्र को वर मांगने को कहा तो ऋषि विश्वामित्र ने गायत्री देवी से दूसरे स्वर्ग की मांग की। गायत्री देवी ने विश्वामित्र को यह वर देने से इंकार कर दिया। जिससे ऋषि विश्वामित्र ने क्रोध में आकर गायत्री देवी को शापित कर दिया। इससे गायत्री देवी ने क्रोधित होकर एक उग्र रूप धारण कर लिया। माँ के इस उग्र रूप में उनके मुख के चारों और वल्गा (सुरक्षा कवच) चल रहा था। माँ के इस उग्र रूप को बगलामुखी का नाम दिया गया । माता का यह ब्रह्मचारिणी रूप था और माँ ने पीत (पीले) रंग का जनेऊ और पीत (पीले) रंग के वस्त्र धारण किये हुए थे।

दूसरी कथा के अनुसार कहा जाता है कि एक बार भगवान विष्णु को क्षीर सागर में विश्राम करते हुए पृथ्वी पर राक्षशों द्वारा उनको भक्तों को प्रताड़ित करने का ज्ञात हुआ तो उन्होंने कठोर तपस्या शुरू कर दी। जिससे 'सौराष्ट्र के पीत सरोवर' में महात्रिपुर सुंदरी के तेज़ से पीताम्बरा देवी प्रगट हुई। जिसका रूप बहुत उग्र और तेज़ था। 

तीसरी कथा के अनुसार महाप्रलय के समय पृथ्वी पर भयंकर तूफ़ान आया। उस सम्य पृथ्वी की रक्षा हेतु सभी देवताओं ने भगवान शंकर के आगे प्रार्थना की। तभी देवताओं की प्रार्थना से शिव के त्रिनेत्र से एक अध्भुत शक्ति प्रगट हुई, जिसे बगलामुखी शक्ति के नाम से जाना गया। जो कि पीले वस्त्र और पीला जनेऊ धारण किये हुए उग्र और तेज़ स्वाभाव वाली देवी है।  

नाथपंथ के संस्थापक गुरु दत्तात्रेय जी ने देवी का वर्णन चतुर्भुजी, त्रिनेत्रा और पीताम्बर धारण किये हुए बताया है और उनके एक हाथ में गदा, एक हाथ में ब्रह्मपाश, एक हाथ में शत्रु जिव्हा कीलय-शस्त्र और एक हाथ से देवी शत्रु की जिव्हा खींचते हुए दिखाई गयी है। 

भगवती बगलामुखी देवी दस-महाविद्याओं में से एक देवी है। पीताम्बरा बगलामुखी देवी की साधना व्यक्ति के सभी दुःख-दरिद्र, विघन-बाधाएं, निराशा और जीवन के सभी कष्टों का तुरंत नाश करने वाली साधना है। जो व्यक्ति बगलामुखी माता की साधना निरंतर करना शुरू कर देता है, माँ बगलामुखी छाया रूप में आठों पहर व्यक्ति के साथ रहकर उसकी रक्षा करती हैं और उसके शत्रुओं का नाश करती है। माँ बगलामुखी के साधकों के चारों और एक रक्षा कवच बन जाता है जो साधक का सभी कष्टों और विपत्तियों से रक्षा करता है। 

माँ बगलामुखी दस-महाविद्याओं में से सबसे उग्र और तीव्र शक्ति मानी जाती है। इस देवी की साधना बहुत पवित्रता और ब्रह्मचर्य का पालन करके करनी चाहिए। 

बगलामुखी देवी साधना विधि 
Baglamukhi Sadhna Vidhi 

बगलामुखी देवी की साधना में आपको कुछ नियम अपनाने बहुत आवश्यक होते हैं। हम आपको नीचे एक-एक करके नियम बताते हैं। 

1. माँ बगलामुखी की साधना आपने किसी भी गुरुवार को शुरू करनी है 

2. इस साधना में पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना है और पवित्रता का खास ध्यान रखना है।

3. साधना करने से पहले माँ बगलामुखी का एक चित्र लेकर घर में किसी स्वच्छ स्थान में किसी चौंकी पर पीला वस्त्र बिछाकर स्थापित कर देना है और देवी की प्रतिमा को गंगाजल से शुद्ध कर देना हैं। यदि प्रतिमा के साथ देवी का यन्त्र स्थापित करके साधना की जाये तो अधिक लाभ होगा। 

4. साधना में देवी को पीले फूल अर्पण करने हैं और देवी की प्रतिमा या यन्त्र को केसर या हल्दी का तिलक करना हैं और माँ बगलामुखी को पूजा में चावल में हल्दी मिलकर अर्पण करने हैं। 

5. साधना में देवी की प्रतिमा या यन्त्र के आगे जल का लोटा, धुप, हल्दी लगाई हुई बत्ती में दीपक प्रज्वल करना हैं। 

6. आपने साधना में पीले आसान पीले वस्त्र का प्रयोग करना हैं। 

7. इस साधना में हल्दी की माला से जाप करना हैं। 

8. रोज़ाना साधना के आखिर में देवी को केला, बूंदी, पीले लड्डू या पीली बर्फी का भोग लगाना है। इनमें से किसी भी एक चीज़ का भोग लगा सकते हो। 

9. साधनाकाल के बीच-बीच में या आखिर में जितना मंत्र का आपने जाप किया है उसका दशांश (दसवां हिस्सा) मंत्र आहुति देकर हवन करना है। हवन सामग्री में पीली सरसों, हल्दी, हल्दी लगाकर चावल मिलाना अनिवार्य है। यदि आप हवन करने की सरल विधि नहीं जानते हो तो आप हमारे पेज सरल हवन विधि पर क्लिक करके जानकारी हासिल कर सकते हो। 

10. आपने जितने दिन साधना करने का संकल्प लेना है उतने दिन रोज़ाना मंत्र साधना का सम्य, जप संख्या और स्थान एक होना चाहिए। साधना सम्पूर्ण होने के बाद भी रोज़ाना माँ बगलामुखी का मंत्र जप करते रहें, तभी साधना में सफलता मिलेगी और आप एक अच्छे साधक बन सकोगे।  

साधना के पहले दिन आपने घर में किसी स्वच्छ स्थान का चयन कर लेना है। याद रहे यहाँ पर आपने साधना करनी है वहां पर कोई भी अपवित्र स्त्री या अन्य व्यक्ति नहीं जाना चाहिए और वहां पर वातावरण सुगन्धित और शुद्ध रखना है। साधना के पहले दिन सर्वप्रथम गुरु पूजा, गणेश पूजा और कुलदेव पूजा जरूर करनी है। उसके बाद आपने जितने दिन व जितनी संख्या में मंत्र जप करना है उसका संकल्प ले लेना है। संकल्प लेने की जानकारी आप हमारे पेज संकल्प की विधि पर क्लिक करके प्राप्त कर सकते हो। 

उसके बाद आपने सर्वप्रथम माँ बगलामुखी का ध्यान करके 'ॐ ह्लीं भगवती बगलामुखी नमः' (Om Halim Baglamukhi Namha) बोलकर जाप शुरू करना है। 

माँ बगलामुखी मंत्र
Baglamukhi Mata Mantra 

ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्व-दुष्टानां वाचं मुखं पदम् स्तम्भय जिव्हा कीलयं बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ नमः स्वाहा

Maa Baglamukhi Mantra in English

Om Halim Baglamukhi Sarv-Dushtanam Vacham Mukham Padam Satambhay Jivha Kilyam Budhim Vinashya Halim Om Namha Swaha.

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नोट- नवग्रहों के बीज मंत्र की विधि|

*सूर्य बीज मंत्र   *चंद्र बीज मंत्र    *मंगल बीज मंत्र 

*बुध बीज मंत्र   *गुरु बीज मंत्र    *शुक्र बीज मंत्र 

*शनि बीज मंत्र  *राहु बीज मंत्र    *केतु बीज मंत्र 

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